
नई दिल्ली:
अल्कोहॉल का सेवन कर वाहन चलाने की वजह से बढ़ती दुर्घटनाओं और महिला सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों ने नयी तकनीकों का विकास किया है। छात्रों ने ऐसा हेलमेट इजाद किया है, जो आपके सांस में अल्कोहॉल पदार्थों का विश्लेषण करने के बाद ही वाहन चालू होने देता है।
इन छात्रों ने कई तरह की नई और अनूठी पहलों के तहत महिलाओं के लिए एक खास तरह का सुरक्षा उपकरण भी बनाया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में हाल में आयोजित 'एरिक्सन इनोवेशन अवार्ड' के लिए 67 छात्रों ने प्रोजेक्ट जमा किए थे। हालांकि इनमें से सिर्फ पांच छात्रों के प्रोजेक्ट को अंतिम सूची में शामिल किया गया।
सांसों को विश्लेषित करने वाले आधुनिक हेलमेट का विकास आईआईटी (बीएचयू) के छात्रों ने किया है। यह ब्लूटूथ एनक्रिप्शन तकनीक पर काम करता है। इसका विकास शराब पीकर वाहन चलाने और मोटर साइकिल चोरी की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने महिला सुरक्षा को ध्यान में रखकर 'गार्जियन' नाम का एक उपकरण बनाया है। हालांकि, 16 दिसंबर की गैंगरेप की घटना के बाद बनाए गए अन्य ऐप की तरह यह उपकरण भी इंटरनेट पर आधारित है।
खोजकर्ताओं का मानना है कि तीन स्तरीय मोड पर आधारित इस सुरक्षा उपकरण को आभूषणों की तरह पहना जा सकता है। आईआईटी दिल्ली के पारस बत्रा बताते हैं कि मुसीबत में फंसने पर आप किसी भी तरह की संचार व्यवस्था मसलन इंटरनेट, एसएमएस या नजदीकी संचार के माध्यम से अपने करीबी लोगों को सूचित कर सकते हैं। यह पीड़ित की स्थिति को बताने और डाटा को तेजी से प्रसारित करने के लिए एक से ज्यादा मोबाइल फोन टावर का उपयोग करता है।
छात्रों ने वेब डिजाइन, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्टोरेज एंट नेटवर्किंग, ह्यूमेन-मशीन इंटरफेस जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े अपने खोज कार्य प्रस्तुत किए। इस प्रकार के नवाचारों को प्रेरित करने के लिए हर विजेता टीम को 10 लाख रुपये दिए गए।
इन छात्रों ने कई तरह की नई और अनूठी पहलों के तहत महिलाओं के लिए एक खास तरह का सुरक्षा उपकरण भी बनाया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में हाल में आयोजित 'एरिक्सन इनोवेशन अवार्ड' के लिए 67 छात्रों ने प्रोजेक्ट जमा किए थे। हालांकि इनमें से सिर्फ पांच छात्रों के प्रोजेक्ट को अंतिम सूची में शामिल किया गया।
सांसों को विश्लेषित करने वाले आधुनिक हेलमेट का विकास आईआईटी (बीएचयू) के छात्रों ने किया है। यह ब्लूटूथ एनक्रिप्शन तकनीक पर काम करता है। इसका विकास शराब पीकर वाहन चलाने और मोटर साइकिल चोरी की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने महिला सुरक्षा को ध्यान में रखकर 'गार्जियन' नाम का एक उपकरण बनाया है। हालांकि, 16 दिसंबर की गैंगरेप की घटना के बाद बनाए गए अन्य ऐप की तरह यह उपकरण भी इंटरनेट पर आधारित है।
खोजकर्ताओं का मानना है कि तीन स्तरीय मोड पर आधारित इस सुरक्षा उपकरण को आभूषणों की तरह पहना जा सकता है। आईआईटी दिल्ली के पारस बत्रा बताते हैं कि मुसीबत में फंसने पर आप किसी भी तरह की संचार व्यवस्था मसलन इंटरनेट, एसएमएस या नजदीकी संचार के माध्यम से अपने करीबी लोगों को सूचित कर सकते हैं। यह पीड़ित की स्थिति को बताने और डाटा को तेजी से प्रसारित करने के लिए एक से ज्यादा मोबाइल फोन टावर का उपयोग करता है।
छात्रों ने वेब डिजाइन, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्टोरेज एंट नेटवर्किंग, ह्यूमेन-मशीन इंटरफेस जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े अपने खोज कार्य प्रस्तुत किए। इस प्रकार के नवाचारों को प्रेरित करने के लिए हर विजेता टीम को 10 लाख रुपये दिए गए।
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