
राजनाथ सिंह का फाइल फोटो...
नई दिल्ली:
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता, वहां विनाश तय है और बुजुर्गों के साथ बुरा बर्ताव करने वालों को 'भगवान भी माफ नहीं करता।' उन्होंने साथ ही कहा कि अशक्तों के पुनर्वास के लिए भारत में वृद्धाश्रमों का निर्माण करना होगा।
गृह मंत्री ने बुजुर्गों की सहायता के लिए परियोजनाओं की पहल तथा उनके सम्मान के लिए आयोजित एक समारोह के दौरान कहा कि एक सभ्य और शिक्षित समाज से उम्मीद की जाती है कि वह अपने बुजुर्गों का ध्यान रखेगा।
राजनाथ ने कहा कि देश के लिए महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखने के बजाए उसका विश्व गुरू के रूप में उभरना अधिक महत्वपूर्ण है। रामायण की शिक्षाओं को उद्धृत करते हुए सिंह ने कहा कि भगवान राम की तरह अपने सिद्धांतों का पालन करना एक अनोखा गुण है, जिसे हर किसी को सीखना चाहिए और जीवन में अपनाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान राम अपने सिद्धांतों से जरा भी नहीं डिगे और अपने पिता की बात और उनका सम्मान रखने के लिए 14 साल तक वनवास तक के लिए चले गए।
गृह मंत्री ने कहा, 'एक सभ्य , शिक्षित और विकसित समाज से अपने बुजुर्गों का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है। मुझे नहीं पता कि समाज में जीवन मूल्यों के क्षरण के लिए किसे दोषी ठहराऊं....क्या हमें शिक्षा प्रणाली को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए या किसी और को... मुझे समझ नहीं आता।' उन्होंने युवाओं तथा अन्य लोगों से अपील की कि वे न केवल बुजुर्गों की मदद के लिए बल्कि देश को इस प्रक्रिया में मजबूत बनाने के लिए भी सदियों पुरानी भारतीय परंपराओं और मूल्यों से प्रेरणा लें।
गृह मंत्री ने समाज के विभिन्न तबकों से ताल्लुक रखने वाले कई बुजुर्गों को सम्मानित भी किया और कहा कि उन्हें भगवान की शक्ति में अगाध विश्वास है और साथ ही इस बात पर भी कि पूर्व में किए गए अच्छे बुरे कर्मो से जीवन की अवधारणा प्रभावित होती है।
गृह मंत्री ने बुजुर्गों की सहायता के लिए परियोजनाओं की पहल तथा उनके सम्मान के लिए आयोजित एक समारोह के दौरान कहा कि एक सभ्य और शिक्षित समाज से उम्मीद की जाती है कि वह अपने बुजुर्गों का ध्यान रखेगा।
राजनाथ ने कहा कि देश के लिए महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखने के बजाए उसका विश्व गुरू के रूप में उभरना अधिक महत्वपूर्ण है। रामायण की शिक्षाओं को उद्धृत करते हुए सिंह ने कहा कि भगवान राम की तरह अपने सिद्धांतों का पालन करना एक अनोखा गुण है, जिसे हर किसी को सीखना चाहिए और जीवन में अपनाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान राम अपने सिद्धांतों से जरा भी नहीं डिगे और अपने पिता की बात और उनका सम्मान रखने के लिए 14 साल तक वनवास तक के लिए चले गए।
गृह मंत्री ने कहा, 'एक सभ्य , शिक्षित और विकसित समाज से अपने बुजुर्गों का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है। मुझे नहीं पता कि समाज में जीवन मूल्यों के क्षरण के लिए किसे दोषी ठहराऊं....क्या हमें शिक्षा प्रणाली को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए या किसी और को... मुझे समझ नहीं आता।' उन्होंने युवाओं तथा अन्य लोगों से अपील की कि वे न केवल बुजुर्गों की मदद के लिए बल्कि देश को इस प्रक्रिया में मजबूत बनाने के लिए भी सदियों पुरानी भारतीय परंपराओं और मूल्यों से प्रेरणा लें।
गृह मंत्री ने समाज के विभिन्न तबकों से ताल्लुक रखने वाले कई बुजुर्गों को सम्मानित भी किया और कहा कि उन्हें भगवान की शक्ति में अगाध विश्वास है और साथ ही इस बात पर भी कि पूर्व में किए गए अच्छे बुरे कर्मो से जीवन की अवधारणा प्रभावित होती है।
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