
सत्येंद्र जैन (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले पर हलफनामा दाखिल न करने पर दिल्ली सरकार से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई कि जब लोग मर रहे हों तो आपको 24 घंटे का वक्त क्यों चाहिए.
कोर्ट ने कहा, आपकी मंशा मामले को हल्के में लेने की थी और आपने शनिवार को हलफनामा दाखिल नहीं किया. आपको पूरी रात जागकर हलफनामा तैयार कर दाखिल करना चाहिए था. हमने आपको हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त दिया था कि आप अधिकारियों के नाम बता सकें, जो आपकी बात नहीं मान रहे.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक और झटका देते हुए दिल्ली सरकार के हेल्थ सेक्रेट्री को हलफनामा दाखिल करने की इजाजत दे दी हालांकि दिल्ली सरकार ने इसका विरोध किया क्योंकि हेल्थ सेक्रेट्री की ओर से SG रंजीत कुमार ने यह इजाजत मांगी थी. दिल्ली सरकार ने कहा कि केंद्र क्यों दिल्ली सरकार के अधिकारी के लिए हलफनामा देगा.
दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह हलफनामा दाखिल नहीं कर पाए, आज कर देंगे और मामले की सुनवाई मंगलवार को की जाए.
गौरतलब है कि दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के रोकथाम के लिए दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए हैं इसे लेकर अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करना था. सरकार को यह भी बताना था कि ऐसे कौन से अधिकारी हैं, जो उसकी बात नहीं सुनते.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि 'आखिर सरकार यह कैसे कह सकती है कि कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है.'
कोर्ट ने कहा था कि- 'यह बेहद गंभीर आरोप है. लिहाजा कोर्ट के सामने उन अधिकारियों के नाम बताएं, जिन्होंने जिम्मेदारी लेने से मना किया है, लेकिन अधिकारी का नाम बंद लिफाफे में नहीं बल्कि कोर्ट में सबके सामने बताया जाए. कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली की जनता को इस तरह नहीं छोड़ सकते.
इससे पहले दिल्ली में चिकनगुनिया और डेंगू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 26 सितंबर को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर 30 सितंबर तक जवाब मांगा था. एजी ने कोर्ट में कहा था कि अगर दिल्ली सरकार सही तरीके से चिकनगुनिया को रोकने में नाकाम रहती है तो कोर्ट को बताए, फिर ये काम केंद्र सरकार करेगी.
कोर्ट ने कहा, आपकी मंशा मामले को हल्के में लेने की थी और आपने शनिवार को हलफनामा दाखिल नहीं किया. आपको पूरी रात जागकर हलफनामा तैयार कर दाखिल करना चाहिए था. हमने आपको हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त दिया था कि आप अधिकारियों के नाम बता सकें, जो आपकी बात नहीं मान रहे.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक और झटका देते हुए दिल्ली सरकार के हेल्थ सेक्रेट्री को हलफनामा दाखिल करने की इजाजत दे दी हालांकि दिल्ली सरकार ने इसका विरोध किया क्योंकि हेल्थ सेक्रेट्री की ओर से SG रंजीत कुमार ने यह इजाजत मांगी थी. दिल्ली सरकार ने कहा कि केंद्र क्यों दिल्ली सरकार के अधिकारी के लिए हलफनामा देगा.
दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह हलफनामा दाखिल नहीं कर पाए, आज कर देंगे और मामले की सुनवाई मंगलवार को की जाए.
गौरतलब है कि दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के रोकथाम के लिए दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए हैं इसे लेकर अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करना था. सरकार को यह भी बताना था कि ऐसे कौन से अधिकारी हैं, जो उसकी बात नहीं सुनते.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि 'आखिर सरकार यह कैसे कह सकती है कि कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है.'
कोर्ट ने कहा था कि- 'यह बेहद गंभीर आरोप है. लिहाजा कोर्ट के सामने उन अधिकारियों के नाम बताएं, जिन्होंने जिम्मेदारी लेने से मना किया है, लेकिन अधिकारी का नाम बंद लिफाफे में नहीं बल्कि कोर्ट में सबके सामने बताया जाए. कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली की जनता को इस तरह नहीं छोड़ सकते.
इससे पहले दिल्ली में चिकनगुनिया और डेंगू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 26 सितंबर को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर 30 सितंबर तक जवाब मांगा था. एजी ने कोर्ट में कहा था कि अगर दिल्ली सरकार सही तरीके से चिकनगुनिया को रोकने में नाकाम रहती है तो कोर्ट को बताए, फिर ये काम केंद्र सरकार करेगी.
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