
नई दिल्ली:
भारत के नए थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारत के पास नियंत्रण रेखा के पार बने आतंकवादियों के अड्डों के खिलाफ कार्रवाई करने का हक है, और अगर ज़रूरत पड़ी तो सेना और सर्जिकल स्ट्राइक करने से हिचकिचाएगी नहीं.
पिछले सप्ताह 27वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल रावत ने कहा कि नवंबर, 2016 में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक "एक खास संदेश देने के उद्देश्य से किए गए थे..." उन्होंने कहा, "अगर सीमा के पार और भी आतंकी अड्डे हैं, और वे नियंत्रण रेखा पर हमारी ओर के हालात को बिगाड़ना जारी रखते हैं, तो हमारे पास आतंकवादियो के खिलाफ कार्रवाई करने का हक है, जिन्हें सीमापार से हमारे दुश्मन से समर्थन मिल रहा है..."
जनरल रावत के मुताबिक, 29 नवंबर को किए गए सर्जिकल स्ट्राइक 'अच्छी योजना' बनाकर किए गए. जनरल रावत उस वक्त वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे, और उन्होंने खुद सभी ऑपरेशनों पर नज़र रखी थी. उन्होंने बताया, "बहुत भारी तैयारी की गई थी, और फिर उसे अंजाम दिया गया..." उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन पर 'रीयल टाइम' निगरानी की गई थी, ताकि सेना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
जनरल बिपिन रावत ने कहा, "इसका श्रेय इन ऑपरेशनों की अच्छी योजना बनाने वाले मेरे पूर्ववर्ती को, नॉर्दर्न आर्मी कमांडर तथा ज़मीनी फौजियों को जाता है..."
सेना प्रमुख की नियुक्ति पर इस बार विवाद भी खूब हुआ. कांग्रेस, वाम मोर्चा समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ रक्षा प्रतिष्ठान के एक वर्ग ने भी सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सेना की नियुक्तियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है.
इस पर जनरल रावत कहते हैं, 'सरकार का फैसला व्यक्तियों से प्रभावित नहीं हो सकता. अगर यह सब इतना आसान होता, तो हर कोई सरकार के पीछे अपनी पसंदीदा पोस्ट के लिए भाग रहा होता.'
पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेट जनरल प्रवीन बख्शी और दक्षिणी कमान प्रमुख पीएम हरीज़ की वरिष्ठता के बारे में पूछे जाने पर जनरल रावत कहते हैं, ' हमने कई बार साथ-साथ खाना खाया है, हम एक साथ बड़े हुए हैं और मैं समझता हूं कि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानते हैं.'
पिछले सप्ताह 27वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल रावत ने कहा कि नवंबर, 2016 में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक "एक खास संदेश देने के उद्देश्य से किए गए थे..." उन्होंने कहा, "अगर सीमा के पार और भी आतंकी अड्डे हैं, और वे नियंत्रण रेखा पर हमारी ओर के हालात को बिगाड़ना जारी रखते हैं, तो हमारे पास आतंकवादियो के खिलाफ कार्रवाई करने का हक है, जिन्हें सीमापार से हमारे दुश्मन से समर्थन मिल रहा है..."
जनरल रावत के मुताबिक, 29 नवंबर को किए गए सर्जिकल स्ट्राइक 'अच्छी योजना' बनाकर किए गए. जनरल रावत उस वक्त वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे, और उन्होंने खुद सभी ऑपरेशनों पर नज़र रखी थी. उन्होंने बताया, "बहुत भारी तैयारी की गई थी, और फिर उसे अंजाम दिया गया..." उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन पर 'रीयल टाइम' निगरानी की गई थी, ताकि सेना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
जनरल बिपिन रावत ने कहा, "इसका श्रेय इन ऑपरेशनों की अच्छी योजना बनाने वाले मेरे पूर्ववर्ती को, नॉर्दर्न आर्मी कमांडर तथा ज़मीनी फौजियों को जाता है..."
सेना प्रमुख की नियुक्ति पर इस बार विवाद भी खूब हुआ. कांग्रेस, वाम मोर्चा समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ रक्षा प्रतिष्ठान के एक वर्ग ने भी सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सेना की नियुक्तियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है.
इस पर जनरल रावत कहते हैं, 'सरकार का फैसला व्यक्तियों से प्रभावित नहीं हो सकता. अगर यह सब इतना आसान होता, तो हर कोई सरकार के पीछे अपनी पसंदीदा पोस्ट के लिए भाग रहा होता.'
पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेट जनरल प्रवीन बख्शी और दक्षिणी कमान प्रमुख पीएम हरीज़ की वरिष्ठता के बारे में पूछे जाने पर जनरल रावत कहते हैं, ' हमने कई बार साथ-साथ खाना खाया है, हम एक साथ बड़े हुए हैं और मैं समझता हूं कि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानते हैं.'
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