
नई दिल्ली:
दिल्ली के विज्ञान भवन में आठवें मनरेगा दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस योजना की उपलब्धियां गिनाईं।
इस मौके पर सोनिया गांधी ने कहा कि दूसरी हरित क्रांति में मनरेगा की भूमिका अहम होगी, साथ ही इसमें आधुनिक तकनीक के जरिये सुधार लाया जाएगा। देश के विकास में मनरेगा की भूमिका को अहम मानते हुए सोनिया ने कहा कि इससे कृषि उत्पादन की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
सोनिया ने कहा, मेरा मानना है कि मनरेगा में कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी करने की जबर्दस्त क्षमता है, जिसका कि हमने आज की तारिख में पूरी तरह दोहन नहीं किया है। इसमें बहुत सारी संभावनाएं हैं। इसमें न सिर्फ गावों में सामुदायिक संपत्ति के सृजन की प्रचुर संभावना है, बल्कि इसमें लघु एवं मध्यम किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, भूमि विकसित करने और कृषि को बढ़ावा देने की भी बहुत संभावना है।
उन्होंने कहा कि कृषि में आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ इस योजना को जोड़कर किसानों की उपज को गई गुणा बढ़ाया जा सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि दूसरी हरित क्रांति के हमारे सपने को पूरा करने में मनरेगा एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में इस योजना को और ज्यादा कारगर बनाने पर जोर देते हुए बताया कि इस योजना के तहत मंजूर कामों की सूची में 30 नए काम जोड़े गए हैं। इनमें से ज्यादातर का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजी-रोटी उपलब्ध कराने पर है।
प्रधानमंत्री ने मनरेगा को दुनिया की सबसे बड़ी योजना बताते हुए कहा कि इससे आठ करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 47 फीसदी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मनरेगा से न सिर्फ लोगों का गांवों से पलायन थमा है, बल्कि सूखे इलाके में कृषि के विकास के लिए माहौल बना है। पीएम ने कहा कि मनरेगा से समाज के एससी, एसटी और दूसरे कमजोर तबके को फायदा मिला है और महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर मजदूरी मिलती है।
प्रधानमंत्री का मानना है कि अगर सारी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया जाए, तो विकास की रफ्तार तेज हो सकती है। मनरेगा दिवस पर इस विशेष समारोह में पंचायतों से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया।
इस मौके पर सोनिया गांधी ने कहा कि दूसरी हरित क्रांति में मनरेगा की भूमिका अहम होगी, साथ ही इसमें आधुनिक तकनीक के जरिये सुधार लाया जाएगा। देश के विकास में मनरेगा की भूमिका को अहम मानते हुए सोनिया ने कहा कि इससे कृषि उत्पादन की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
सोनिया ने कहा, मेरा मानना है कि मनरेगा में कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी करने की जबर्दस्त क्षमता है, जिसका कि हमने आज की तारिख में पूरी तरह दोहन नहीं किया है। इसमें बहुत सारी संभावनाएं हैं। इसमें न सिर्फ गावों में सामुदायिक संपत्ति के सृजन की प्रचुर संभावना है, बल्कि इसमें लघु एवं मध्यम किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, भूमि विकसित करने और कृषि को बढ़ावा देने की भी बहुत संभावना है।
उन्होंने कहा कि कृषि में आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ इस योजना को जोड़कर किसानों की उपज को गई गुणा बढ़ाया जा सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि दूसरी हरित क्रांति के हमारे सपने को पूरा करने में मनरेगा एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में इस योजना को और ज्यादा कारगर बनाने पर जोर देते हुए बताया कि इस योजना के तहत मंजूर कामों की सूची में 30 नए काम जोड़े गए हैं। इनमें से ज्यादातर का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजी-रोटी उपलब्ध कराने पर है।
प्रधानमंत्री ने मनरेगा को दुनिया की सबसे बड़ी योजना बताते हुए कहा कि इससे आठ करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 47 फीसदी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मनरेगा से न सिर्फ लोगों का गांवों से पलायन थमा है, बल्कि सूखे इलाके में कृषि के विकास के लिए माहौल बना है। पीएम ने कहा कि मनरेगा से समाज के एससी, एसटी और दूसरे कमजोर तबके को फायदा मिला है और महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर मजदूरी मिलती है।
प्रधानमंत्री का मानना है कि अगर सारी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया जाए, तो विकास की रफ्तार तेज हो सकती है। मनरेगा दिवस पर इस विशेष समारोह में पंचायतों से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया।
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