
इसरो के मार्स आर्बिटर ने चंद्रमा की कक्षा को पार कर लिया है और यह उससे आगे की यात्रा पर बढ़ रहा है। इसरो सूत्रों ने बताया, ‘मंगल आर्बिटर अंतरिक्ष यान चांद की कक्षा को पार कर गया है। इस तरह तकनीकी रूप से यह हमारे चंद्रयान की कक्षा को पारकर अब चांद से आगे बढ़ रहा है। यह 10 लाख किलोमीटर की दूरी प्रतिदिन तय कर रहा है।’ उन्होंने बताया कि यह पहला मौका है जब भारत निर्मित किसी उपकरण को सुदूर अंतरिक्ष में भेजा गया है।
इसरो का मार्स आर्बिटर मिशन रविवार को पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकल गया था और इसने ‘लाल ग्रह’ की 300 दिनों की अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। इसे भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
इसरो ने ट्रांस मार्स इंजेक्शन प्रक्रिया को रविवार तड़के पूरा किया था। इसका उद्देश्य मार्स आर्बिटर अंतरिक्ष यान को सूर्य के चारों ओर मौजूद प्रस्तावित कक्षा में भेजना था। मंगल की कक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ने में किसी तरह का भटकाव होने की दशा में इसमें चार सुधार की योजना बनाई गई है।
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