नई दिल्ली:
गांधीवादी अन्ना हज़ारे ने बुधवार को संसद की स्थायी समिति से अनुरोध किया कि वह सरकार से लोकपाल विधेयक को वापस लेने और आम आदमी को भ्रष्टाचार से होने वाली दिक्कतें दूर करने के प्रावधानों के साथ नया विधेयक तैयार करने की सिफारिश करे। हज़ारे ने समिति के समक्ष अपने विचार जाहिर करने के बाद संवाददाताओं से कहा, हमारी बैठक अच्छी रही और हमने समिति से विधेयक वापस लेने की सरकार से सिफारिश करने का अनुरोध किया। हमें उम्मीद की एक किरण दिखायी दी है। समिति ने हमसे कहा कि आप अपना बिल :समाज के सदस्यों का जनलोकपाल विधेयक: भी दें और हम दोनों विधेयकों पर गौर करेंगे। हमने समिति को बताया कि सरकार ने जो विधेयक पेश किया है, वह गरीबों के साथ न्याय करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर समिति 16 अगस्त तक विधेयक को लौटाने की सिफारिश करने का फैसला नहीं करती है तो वह अनशन करेंगे। हज़ारे ने कहा, हमारा अनशन संसद के विरोध में नहीं, बल्कि सरकार के विरोध में होगा क्योंकि उसने कमजोर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला विधेयक पेश किया है। लोकपाल विधेयक चार अगस्त को लोकसभा में पेश हुआ था और इसे आठ अगस्त को राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी की अध्यक्षता वाली कार्मिक, जन शिकायत और विधि तथा न्याय मामलों की स्थायी समिति के पास भेज दिया था। इस समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिये तीन महीने का वक्त दिया गया है। लोकपाल विधेयक पर स्थायी समिति की आज हुई पहली बैठक में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण दिया और फिर समाज के सदस्यों के रूप में हज़ारे, अरविंद केजरीवाल, शांति भूषण, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने अपने विचार रखे। हज़ारे पक्ष की समिति के साथ बैठक करीब डेढ़ घंटे चली।