
प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:
कर्नाटक में राज्यपाल द्वारा बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता देने के खिलाफ कांग्रेस की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली इस सुनवाई के बाद कहा कि येदियुरप्पा पहले से तय समय पर ही शपथ लेंगे. कोर्ट ने कहा कि हम राज्यपाल को नोटिस जारी नहीं कर सकते. गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस ने कर्नाटक में बीजेपी को न्यौता देने के खिलाफ बुधवार रात को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) से मुलाकात की थी . इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सीजेआई से मांग की है कि वह इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई बुधवार देर रात और गुरुवार तड़के ही पूरी करें. कांग्रेस पार्टी की इस मांग को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार तड़के दो बजे सुनवाई शुरू हुई थी. जो सुपह साढ़े चार बजे तक चली. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का मोहलत देने पर भी सवाल खड़े किए. सुनवाई पूरे होने के बाद ही कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है.
गौरतलब है कि सीजेआई से मुलाकात के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई सभरवाल के उस फैसले का भी हवाला दिया. 2006 के इस फैसले में कहा गया है कि 'अगर एक राजनीतिक दल दूसरे राजनीतिक दलों या विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा करता है और राज्यपाल को स्थिर सरकार बनाने के लिए बहुमत के लिए संतुष्ट करत है तो राज्यपाल सरकार बनाने से इनकार नहीं कर सकता और बहुमत के उसके दावे को अपने इस आकलन के आधार पर खारिज नहीं कर सकता है कि वो बहुमत अवैध या अनैतिक तौर से हासिल किया गया है.ऐसा कोई भी अधिकारी राज्यपाल के पास नहीं है. ऐसा अधिकार बहुमत के राज वाले लोकतांत्रिक सिद्धांत के खिलाफ होगा.'
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गौरतलब है कि कर्नाटक में बुधवार रात को राज्यपाल ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया है. इस न्यौते के बाद अब येदियुरप्पा गुरुवार सुबह राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. इससे पहले बुधवार शाम कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य में सरकार बनाने का दावा किया था. मुलाकात के दौरान दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के समर्थन देने को लेकर एक लिखित प्रस्ताव भी राज्यपाल को दिया था.
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हालांकि इस प्रस्ताव के भी राज्यपाल ने बीजेपी को पहले सरकार बनाने का न्यौता दिया है. राज्यपाल के इस फैसले का कांग्रेस और जेडीएस ने विरोध किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राज्यपाल का यह फैसला असंवैधानिक है.
VIDEO: सीजेआई से कांग्रेस ने की अपील.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल सिर्फ एक पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. उनके इस फैसले राज्यपाल के पद की गरिमा को ठेस पहुंची है.
Three-judge bench of Justice AK Sikri, Justice Ashok Bhushan and Justice Gobde to hear Congress & JD(S) petition challenging Karnataka Governor's decision at 1:45 am #KarnatakaElections
— ANI (@ANI) May 16, 2018
गौरतलब है कि सीजेआई से मुलाकात के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई सभरवाल के उस फैसले का भी हवाला दिया. 2006 के इस फैसले में कहा गया है कि 'अगर एक राजनीतिक दल दूसरे राजनीतिक दलों या विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा करता है और राज्यपाल को स्थिर सरकार बनाने के लिए बहुमत के लिए संतुष्ट करत है तो राज्यपाल सरकार बनाने से इनकार नहीं कर सकता और बहुमत के उसके दावे को अपने इस आकलन के आधार पर खारिज नहीं कर सकता है कि वो बहुमत अवैध या अनैतिक तौर से हासिल किया गया है.ऐसा कोई भी अधिकारी राज्यपाल के पास नहीं है. ऐसा अधिकार बहुमत के राज वाले लोकतांत्रिक सिद्धांत के खिलाफ होगा.'
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गौरतलब है कि कर्नाटक में बुधवार रात को राज्यपाल ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया है. इस न्यौते के बाद अब येदियुरप्पा गुरुवार सुबह राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. इससे पहले बुधवार शाम कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य में सरकार बनाने का दावा किया था. मुलाकात के दौरान दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के समर्थन देने को लेकर एक लिखित प्रस्ताव भी राज्यपाल को दिया था.
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हालांकि इस प्रस्ताव के भी राज्यपाल ने बीजेपी को पहले सरकार बनाने का न्यौता दिया है. राज्यपाल के इस फैसले का कांग्रेस और जेडीएस ने विरोध किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राज्यपाल का यह फैसला असंवैधानिक है.
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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल सिर्फ एक पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. उनके इस फैसले राज्यपाल के पद की गरिमा को ठेस पहुंची है.