
इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन निलेकणि
बेंगलुरू:
इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन निलेकणि का मानना है कि वह खुशनसीब थे जिससे वह IIM की प्रवेश परीक्षा नहीं दे पाये. क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो वह नारायण मूर्ति से नहीं जुड़ पाते. नारायणमूर्ति ने चार अन्य संस्थापकों के साथ मिलकर इंफोसिस बनायी. यहां उद्योग मंडल सीआईआई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘मैं आईआईएम प्रवेश परीक्षा नहीं दे सका और इसके लिये मैं स्वयं को भाग्यशाली मानता हूं...मुझे नौकरी चाहिए थी और इसके लिये मैं एक छोटी कंपनी में गया जहां नारायण मूर्ति ने मुझे काम दिया. उसके बाद हमारा बढ़िया रिश्ता रहा और उसके बाद इंफोसिस शुरू हुई. उसके बाद की बाकी बातें सब जानते हैं.’’
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निलेकणि ने कहा कि अगर वह परीक्षा पास कर जाते, तब वह साबून बेचने को लेकर या किसी कंपनी का प्रबंधक होता.
वीडियो: नंदन निलेकणि बोले, भ्रष्टाचार रोकने का सबसे बड़ा हथियार बना 'आधार'
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘‘मेरे ज्वाइन करने के बाद इंफोसिस में परीक्षा शुरू हो गयी. मैं खुशनसीब था कि परीक्षा शुरू होने से पहले इंफोसिस में पहुंच गया.’’ निलेकणि ने आगे कहा कि उन्होंने जो समय आईआईटी में बिताया, उससे जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ आया.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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निलेकणि ने कहा कि अगर वह परीक्षा पास कर जाते, तब वह साबून बेचने को लेकर या किसी कंपनी का प्रबंधक होता.
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उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘‘मेरे ज्वाइन करने के बाद इंफोसिस में परीक्षा शुरू हो गयी. मैं खुशनसीब था कि परीक्षा शुरू होने से पहले इंफोसिस में पहुंच गया.’’ निलेकणि ने आगे कहा कि उन्होंने जो समय आईआईटी में बिताया, उससे जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ आया.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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