प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:
भारतीय वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज के लिए महत्वपूर्ण परियोजना में डाटा विश्लेषण सहित अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाजमा रिसर्च गांधीनगर, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) पुणे और राजारमन सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलाजी इंदौर सहित कई संस्थान इस परियोजना से जुड़े थे।
गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज की घोषणा आईयूसीएए पुणे और वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने समानांतर रूप से की। भारत उन देशों में से भी एक है जहां गुरूत्वाकषर्ण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।
उधर, परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए गुरुवार को भारतीय वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाजमा रिसर्च गांधीनगर, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) पुणे और राजारमन सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलाजी इंदौर सहित कई संस्थान इस परियोजना से जुड़े थे।
गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज की घोषणा आईयूसीएए पुणे और वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने समानांतर रूप से की। भारत उन देशों में से भी एक है जहां गुरूत्वाकषर्ण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।
उधर, परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए गुरुवार को भारतीय वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी।
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