टीकाकरण नीति के बचाव में केंद्र, सुप्रीम कोर्ट से कहा- न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं

आज सुबह होने वाली सुनवाई से पहले रविवार शाम 218 पेज के हलफनामे में केंद्र सरकार ने कोर्ट के सभी सवालों के विन्दुवार जवाब दिए हैं. 

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने वैक्सिनेशन के अलावा कोविड प्रबंधन की ताजा और विस्तृत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है. सोमवार सुबह होने वाली सुनवाई से पहले रविवार शाम 218 पेज के हलफनामे में केंद्र सरकार ने कोर्ट के सभी सवालों के विन्दुवार जवाब दिए हैं. जहां केंद्र ने अपनी टीकाकरण नीति का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. केंद्र ने कहा है कि देश भर में कोई भी कोविड मरीज कहीं भी अस्पताल में दाखिल हो सकता है. यानी आरटीपीसीआर रिपोर्ट या राज्य शहर में रहने के आधार कार्ड की जरूरत नहीं होगी. 

केंद्र सरकार ने ये भी जानकारी दी है कि कोविड सेंटर, बिस्तर, डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई है.रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल छात्रों को भी कोविड सेवा कार्य में लगाया जा रहा है. सौ दिन कोविड सेवा कार्य करने वालों को आर्थिक रूप से इंसेंटिव देने की भी पहल की है. वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ वैक्सीन की उपलब्धता भी बढ़ाई गई हैं. पहले 60 से ऊपर, फिर 45 से साठ और अब 18 से 44 साल की उम्र वालों के लिए भी टीकाकरण शुरू कर दिया गया. राज्य भी वैक्सीन उत्पादकों से सीधे खरीद रहे हैं. 

केंद्र सरकार के हलफनामे में वैक्सीन की कीमत पर बात कही गई है. सरकार ने कहा है कि वैक्सीन उत्पादकों से बात कर यह तय कर दिया गया है कि सभी राज्यों को समान दर पर वैक्सीन मिलेगी, लेकिन केंद्र को सस्ती वैक्सीन देने के पीछे वजह ये बताई गई है कि केंद्र ने बड़े ऑर्डर और पेशगी रकम कंपनी को दी है. 


अपनी वैक्सीनेशन पॉलिसी का किया बचाव
केंद्र सरकार ने अपनी वैक्सीनेशन पॉलिसी का बचाव भी किया. केंद्र ने कहा  बड़े जनहित में ये फैसला कार्यपालिका पर छोड़ दें, किसी भी न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर वैक्सीन नीति तैयार की गई है और यह फैसला उच्चतम कार्यकारी स्तर पर लिया गया है. वैक्सीन मूल्य निर्धारण लंबे समय के लिए एक अहम माध्यम है जिसे देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार करने के बाद किया गया है. कई बार एक आसन्न संकट से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाए जाते हैं जो एक लंबे समय के लिए चल सकते हैं. बता दें कि इस मामले पर आज सुनवाई होनी है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने चारों मुद्दों पर केंद्र से जवाब मांगा था 
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, उन्होंने  27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने चारों मुद्दों पर केंद्र से जवाब मांगा था. पहला मुद्दा ऑक्सीजन की आपूर्ति, राज्यों की अनुमानित आवश्यकता, केंद्रीय पूल से ऑक्सीजन के आवंटन का आधार, एक गतिशील आधार पर राज्यों की आवश्यकता के लिए संचार कीअपनाई गई कार्यप्रणाली को लेकर था. दूसरे मुद्दे में कोविड बेड समेत महत्वपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं में वृद्धि शामिल है. तीसरे मुद्दे के तहत  रेमेडेसिविर, फेविपिविर सहित आवश्यक दवाओं की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम आता है. और चौथे मुद्दे में टीकाकरण को लेकर सवाल किए गए थे.