Blood Pressure Difference in Both Arms: घर में रखी डिजिटल बीपी मशीन से जब भी हम अपना ब्लड प्रेशर नापते हैं, तो कभी-कभी मन में यह ख्याल आ ही जाता है कि चलो दूसरे हाथ से भी चेक करके देखते हैं. लेकिन जैसे ही दूसरे हाथ का कफ बंधता है और स्क्रीन पर नंबर उभरते हैं, तो दोनों हाथों के आंकड़ों में फर्क देखकर माथा ठनक जाता है. एक हाथ का सिस्टोलिक नंबर 120 बता रहा होता है तो दूसरे में वही 130 पार नजर आता है. ऐसे में इंसान घबरा जाता है कि कौन सी रीडिंग सही है और क्या शरीर के अंदर कोई बड़ी खराबी आ गई है? आइए इस पूरे उलझन भरे मामले को सीधी और सहज भाषा में समझते हैं.
दोनों हाथों की रीडिंग में फर्क क्यों आता है?
हकीकत यह है कि दोनों हाथों के ब्लड प्रेशर में थोड़ा-बहुत अंतर होना पूरी तरह सामान्य बात है. हमारे शरीर की दोनों तरफ की बनावट बिल्कुल एक जैसी नहीं होती.
नसों की बनावट का अंतर: दाएं और बाएं हाथ की रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों की मोटाई और उनमें खून के बहाव की गति में कुदरती तौर पर मामूली फर्क रहता है. दिल से निकलने वाली मुख्य धमनी दोनों हाथों तक एक जैसे रास्ते से खून नहीं पहुंचाती.
नापने के तरीके की गलतियां: अगर मशीन का कफ एक हाथ में ढीला और दूसरे में बहुत कसकर बांध दिया गया हो, तो रीडिंग बदल जाएगी. इसके अलावा कफ का साइज सही न होना या हाथ का दिल के लेवल से ऊपर-नीचे होना भी आंकड़ों को हिला देता है.
चाय, कॉफी और घबराहट: पहले हाथ का बीपी देखकर अगर मन में अचानक बेचैनी बढ़ गई, या फिर जांच से कुछ मिनट पहले चाय-कॉफी पी थी या सीढ़ियां चढ़कर आए थे, तो दूसरे हाथ की रीडिंग अपने आप ऊपर चढ़ जाती है.

कितना अंतर सामान्य है और कब संभलना चाहिए?
आरजी हॉस्पिटल्स, ईस्ट ऑफ कैलाश (नई दिल्ली) की सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन डॉ. शुभ्रा गुप्ता इस बारे में बहुत पते की बात बताती हैं.
डॉ. शुभ्रा गुप्ता के मुताबिक, "दोनों हाथों के ऊपर वाले नंबर यानी सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में अगर 5 से 10 mmHg का मामूली अंतर दिखता है, तो बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है. यह शरीर का स्वाभाविक उतार-चढ़ाव है. लेकिन अगर हर बार जांच करने पर दोनों हाथों के बीच 10 से 15 mmHg या उससे ज्यादा का बड़ा फासला लगातार बना रहता है, तो इसे कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए."
डॉ. शुभ्रा आगे चेतावनी देती हैं कि बार-बार इतना बड़ा अंतर आना नसों के सिकुड़ने, खून के रास्ते में किसी रुकावट या दिल व धमनियों से जुड़ी अंदरूनी दिक्कतों का इशारा हो सकता है.
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बीपी नापते वक्त कौन से नियम बांध लें?
- सटीक और सही रीडिंग हासिल करने के लिए हड़बड़ी में मशीन चालू न करें.
- कुर्सी पर बैठकर कम से कम पांच मिनट तक शांत रहें, पैरों को जमीन पर सीधा टिकाएं और पीठ को सहारा देकर बैठें.
- जिस हाथ में कफ बंधा हो, वह हाथ मेज पर टिका होना चाहिए ताकि कफ दिल की सीध में रहे.
- शुरुआत में हमेशा दोनों हाथों का बीपी नापें. अगर एक हाथ में हमेशा रीडिंग ज्यादा आती है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद भविष्य की सभी जांचें उसी हाथ से करनी चाहिए.
कब तुरंत इमरजेंसी की तरफ भागना चाहिए?
अगर दोनों हाथों के बीपी में भारी अंतर दिख रहा हो और साथ ही ये गंभीर लक्षण भी महसूस हों:
- सीने में अचानक भारीपन या तेज दर्द का उठना.
- सांस लेने में तकलीफ होना या दम घुटने जैसा लगना.
- बदन के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी आना या आवाज लड़खड़ाने लगना.
- ऐसी स्थिति बनने पर घर बैठकर इंतजार करने की गलती न करें, तुरंत नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचना ही समझदारी है.
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