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'जब दुख हो, तो खुद से पूछें', BK Shivani ने बताया दुख कम करने का आसान तरीका

कई लोगों के मन में दुख या किसी घटना की छवि ऐसी बैठ जाती है कि वह उससे बाहर निकलने में बहुत ज्यादा लगा देते हैं. बीके शिवानी ने बताया कि किसी भी दुख से बाहर निकलने के लिए क्या करना चाहिए.

'जब दुख हो, तो खुद से पूछें', BK Shivani ने बताया दुख कम करने का आसान तरीका
बीके शिवानी के विचार

जीवन में जरूरी नहीं सभी चीजों सही ही रहे. लाइफ में कभी न कभी हर इंसान को किसी के बात, व्यवहार और किसी घटना का दुख जरूर होता है. कई लोगों के मन में दुख या किसी घटना की छवि ऐसी बैठ जाती है कि वह उससे बाहर निकलने में बहुत ज्यादा लगा देते हैं. लोगों के मन में दुख इतना गहरा हो जाता है कि वो लंबे समय तक उस दुख को मन में ढोते रहता है. मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक मार्गदर्शक बीके शिवानी लोगों को अक्सर लाइफ में पॉजिटिव रहने और सही फैसले लेने के बारे में जागरूक करती रहती है.

बीके शिवानी के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की कही हुई बात या उसका व्यवहार हमारे मन पर गहरा असर छोड़ देता है. कई बार दूसरों के शब्द हमें इतने प्रभावित कर देते हैं कि हम उन्हें बार-बार सोचते रहते हैं और उनसे जुड़ा दुख या भावना लंबे समय तक हमारे मन से नहीं निकलती. ऐसे समय में हमें अपना नजरिया बदलना चाहिए. उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास नहीं होता. हर कोई खुद को बदलने के लिए तैयार भी नहीं होता. कई बार सामने वाले को लगता ही नहीं कि उसने कुछ गलत किया है.

जब भी दुख हो, खुद से पूछें, कितना और कब तक?

बीके शिवानी के मुताबिक, आपका मन कहेगा कि उसने मुझे दुख पहुंचाया है, उसे माफी मांगनी चाहिए और अपना व्यवहार बदलना चाहिए, लेकिन हो सकता है कि ऐसा कभी न हो. शायद उस व्यक्ति को अपनी गलती न दिखे या फिर वह खुद को बदलने में सक्षम न हो. उन्होंने बताया कि किसी की बात को मन में बार-बार दोहराकर हम खुद को और ज्यादा दुख पहुंचाते हैं. इसलिए अपनी सोच को बदलना जरूरी है. जब हम अपने विचारों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है. उपचार और शांति बाहर से नहीं, बल्कि हमारे अपने विचारों से शुरू होती है.

बीके शिवानी अनुसार, जब कोई हमें दुख पहुंचाता है, तो हमारी यही सोचते हैं कि सामने वाला अपनी गलती माने, माफी मांगे और अपने व्यवहार में बदलाव लाए, लेकिन हम ये कंट्रोल नहीं कर सकते कि सामने वाला हमारे अनुसार प्रतिक्रिया देगा या नहीं. हो सकता है उसे अपनी गलती का एहसास ही न हो या वह बदलना न चाहे. ऐसे में अगर हम लगातार उसी बात को सोचते रहें, तो सबसे ज्यादा नुकसान हमारे अपने मन को होता है. ऐसे में हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम खुद इस दुख से कैसे बाहर निकलें.

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