आज के समय में अधिकतर पारिवारिक क्लेश की वजह लोगों की गलतियां नहीं, बल्कि उन गलतियों को बार-बार मन में दोहराना बन जाता है. ब्रह्माकुमारी बीके शिवानी के अनुसार, हम किसी की बातों से सीख ले सकते हैं, सलाह ले सकते हैं, लेकिन उसकी कमजोरियों को अपने मन में रिकॉर्ड नहीं करना चाहिए. क्योंकि जब हम बार-बार किसी की कमी के बारे में सोचते हैं, तो उसकी कमजोरी हमारी सोच का हिस्सा बन जाती है. ब्रह्माकुमारी बीके शिवानी ने अपने यूट्यूब पर एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि अगर कोई आपको बुरा-भला कहे तो क्या करना चाहिए. आइए जानते हैं उन्होंने क्या सीख दी.
कोई बुरा-भला कहे तो क्या करें?
बीके शिवानी कहती हैं कि अगर कोई आपका अपमान करे, बुरा व्यवहार करे या कठोर शब्द बोले, तो मन में सिर्फ एक विचार रखना चाहिए, 'ये व्यक्ति बहुत अच्छा है.' भले ही सामने वाले के व्यवहार में अच्छाई उस समय दिखाई न दे, लेकिन मन ही मन उसके लिए अच्छे विचार रखने चाहिए.
उनके अनुसार, जब हम किसी के लिए बार-बार सकारात्मक सोच रखते हैं, तो सबसे पहले हमारा अपना मन शांत और शक्तिशाली बनता है. इसके बाद हमारी पॉजिटिव एनर्जी सामने वाले तक पहुंचती हैं, जिससे उसके व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है.
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शुभकामनाएं देना सीखिए
बीके शिवानी के अनुसार हर परिस्थिति में हमें सामने वाले की कमजोरी को नहीं लेना चाहिए, बल्कि अपनी शक्ति उसे देनी चाहिए. अगर कोई गुस्से में बोल रहा है, तो उसकी नाराजगी को अपने मन का हिस्सा बनाने के बजाय उसे शुभकामनाएं देनी चाहिए. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई आपको डांट रहा है, तो मन में यह सोचें कि 'आप एक शांत आत्मा हैं, आप प्रेम से बात करते हैं, आप मेरा सम्मान करते हैं.'
लड़ाई में कोई नहीं जीतता
बीके शिवानी का मानना है कि किसी भी झगड़े में असल में कोई नहीं जीतता, क्योंकि दोनों ही अपनी मानसिक शक्ति खो देते हैं. लेकिन अगर एक व्यक्ति भी शांत रहकर शुभकामनाएं देता है, तो दोनों का फायदा होता है. परिवार का अर्थ भी यही है कि हम एक-दूसरे को शक्ति दें, न कि एक-दूसरे की कमजोरी को बढ़ाएं.
विपरीत परिस्थितियों में कैसा सोचें?
बीके शिवानी कहती हैं कि जब सामने वाला नकारात्मक बातें करे, तब हमें सकारात्मक विचार रखने चाहिए. अगर कोई कहे, 'मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता', तो मन में ये भावना रखें, 'मैं जीवनभर तुम्हारे साथ रह सकता हूं.' उनके अनुसार, सकारात्मक विचार आशीर्वाद की तरह काम करते हैं. जैसे आग पर पानी डालने से उसकी तीव्रता कम हो जाती है, वैसे ही शुभ भावनाएं क्रोध और तनाव को कम करने का काम करती हैं.
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