नवरात्रि चल रहे हैं और हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के हर दिन मां दुर्गा के एक विशेष रूप की आराधना की जाती है. इन दिनों सच्चे मन से मां की पूजा करने और व्रत रखने से देवी दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है. हालांकि, नवरात्रि का पारण अलग-अलग परंपरा और मान्यता के अनुसार किया जाता है. कोई नवरात्रि में अष्टमी, तो कोई नवमी पर कन्या पूजन के बाद व्रत खोलता है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि का पारण कब, कहां और कैसे करें?
शारदीय नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो गई थी. वहीं, 18 तारीख को अष्टमी और 19 अक्टूबर को नवमी होगी.
नवरात्रि व्रत का पारण
कई परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करने के बाद व्रत का पारण कर लिया जाता है. अगर, आप अष्टमी पूजते हैं तो आप अष्टमी के दिन पारण कर सकते हैं और नवमी पूजते हैं तो नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद व्रत खोल सकते हैं.
नवरात्रि व्रत का पारण कैसे करें
अपनी मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी या नवमी के दिन नवरात्रि व्रत का पारण कन्या पूजन के बाद करें. हालांकि, व्रत तोड़ने की इस परंपरा का पालन करने के लिए मुहूर्त या समय देखने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें कन्या पूजन के बाद कभी भी व्रत तोड़ा जा सकता है. कन्या पूजन के दौरान मां दुर्गा को हलवा, पूरी, काले चने, खीर, नारियल, फल और मिठाई का भोग लगाएं.
नवरात्रि व्रत का पारण कहां करें
नवरात्रि व्रत का पारण वहां करें, जहां आपने चौकी या फिर कलश रखा है. यहीं पर मां दुर्गा की पूजा करें. इसके बाद यहीं पर कन्या पूजन करें और फिर अपना व्रत खोल सकते हैं.
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