
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी की ही तरह बीजेपी और शिवसेना के बीच भी सीट बंटवारे को लेकर कोई अंतिम फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है। ऊपर से आरपीआई, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन जैसी पार्टियां भी दो अंकों में सीटें चाहती हैं। ऐसे में शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के जरिये शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सहयोगियों को खूब लताड़ा है।
'सामना' के संपादकीय में उद्धव ने लिखा है, "गठबंधन को सत्ता में लाना सभी घटक दलों का सपना होना चाहिए, ज्यादा सीटों की ललक सबको छोड़नी होगी, इतना मिला तो ही गठबंधन में रहेंगे, नहीं तो अपना रास्ता, ये ठीक नहीं है। याद रखिए ज्यादा लालच तलाक की ओर ले जाता है।"
हालांकि शिवसेना के गरम तेवर पर बीजेपी नरम है। बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने कहा, मैंने संपादकीय पढ़ा नहीं है और न ही मैंने उद्धव ठाकरे का बयान सुना है, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।
महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं। पिछले कई सालों से और 2009 में भी शिवसेना 169 सीटों पर लड़ी थी, उसे जीत मिली थी 44 सीटों पर, जबकि 119 सीटों पर लड़कर बीजेपी 46 सीटें जीतकर लाई थी। ऐसे में लोकसभा में शानदार प्रदर्शन के बाद बीजेपी महाराष्ट्र में छोटे भाई का चोला उतारकर बराबरी चाहती है।
उधर, आरपीआई अठावले, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन जैसे छोटे दलों ने भी दो अंकों में सीट की डिमांड रखी है और मांग नहीं मानने पर धमकी गठबंधन तोड़ने दी है। इन सबके बावजूद बीजेपी का मानना है कि बातचीत सकारात्मक है। महाराष्ट्र विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष विनोद तावड़े ने कहा, बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है। हम जल्द ही सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला ले लेंगे...हम सबका मकसद है कि प्रदेश को कांग्रेस-एनसीपी की भ्रष्ट सरकार से मुक्ति दिलाएं।
सूत्रों के मुताबिक शिवसेना, बीजेपी को 119 से बढ़ाकर लगभग 135 सीटें देने पर तैयार हो गई है, लेकिन अब भी पेंच आरपीआई अठावले, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, राष्ट्रीय समाज पक्ष जैसे घटक दलों को लेकर फंसा है, क्योंकि उन्हें भी सीटों का आंकड़ा 10 के पार चाहिए।
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