फाइल फोटो
बीजेपी और शिवसेना के नेता भले ही कह रहे हों कि उनके बीच कोई टकराव नहीं है, लेकिन 'सामना' में उद्धव ठाकरे के आज के लेख से दोनों दलों के बीच दरार साफ दिख रही है। उद्धव ने लिखा है कि बीजेपी अपने पुराने साथियों को बिना बताए उनके विरोधियों से आंख−मिचौली का खेल करती है। उन्होंने लिखा है कि बीजेपी को अगर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है कि तो घटक दलों में भरोसा पैदा करना होगा।
हालांकि बाद में उद्धव ने सफाई दी और कहा है कि गठबंधन में आए स्पीड ब्रेकर को हटाने की कोशिश है। राजनाथ और मोदी के सामने अपनी बात रखी है।
गौरतलब है कि 'सामना' के संपादकीय में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, आज अगर प्रमोद महाजन होते तो महाराष्ट्र में गठबंधन में जो तनाव आया, वह न आता।
अपने पुराने साथियों को बिना बताए उनके विरिधियों से आंख मिचौली का खेल बीजेपी करती है। ऐसा कई अखबारों में लिखा गया है। बीजेपी को अगर दिल्ली में सत्ता काबिज कर मोदी को पीएम बनाना है तो घटक दलों में भरोसा पैदा करना होगा। भरोसा देकर ही जीता जाता है। अपने पुराने घटक दलों से वफा नहीं करोगे तो जनता बेवफाई करेगी।
1996 में शंकरसिंह वाघेला गुजरात बीजेपी में फूट डालकर शिवसेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन तब शिवसेना प्रमुख ने उन्हें रोका। क्योंकि वह बीजेपी के साथ दोस्ती में दरार नहीं चाहते थी। शिवसेना प्रमुख मौकापरस्त नहीं थे।
याद रहे कि नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से न हटाने पर शिवसेना प्रमुख ने ही जोर दिया था।
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