'उत्तर मध्यमा' परीक्षा में टॉप करने वाले रजनीश यादव के खिलाफ डॉक्यूमेंट्स में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है. उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की ओर से 'उत्तर मध्यमा' परीक्षा आयोजित की जाती है. ये एग्जाम 12वीं क्लास के बराबर होता है. उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने 24 अप्रैल, 2026 को इस एग्जाम का रिजल्ट जारी किया था. जिसमें प्रतापगढ़ के यदुनाथपुर सैफाबाद में श्री राम ताहेल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र रजनीश यादव ने टॉप किया था. रजनीश यादव के 89.36 प्रतिशत अंक आए थे. यहां तक की मेधावी छात्र सम्मान कार्यक्रम के तहत उन्हें 1 लाख रुपये नकद इनाम, टैबलेट, मेडल और सर्टिफिकेट को भी दिया गया था. जिसे अब वापस लेने का आदेश दिया है.
क्या है पूरा मामला
रजनीश यादव के पड़ोसी जगत यादव ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आसपुर देवसरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी. आरोप लगाया कि छात्र के नाम और जन्म तिथि में गड़बड़ी है. शिकायत के अनुसार, पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड, राशन कार्ड और वोटर लिस्ट में उसका नाम अजय कुमार था. जबकि जन्म तिथि 13 मई, 1998 थी. उसके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में नाम बदलकर रजनीश यादव और जन्म तिथि 1 जुलाई, 2010 कर दी गई. फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल संस्कृत स्कूल में उसने दाखिला लिया.
प्रतापगढ़ के जिला स्कूल निरीक्षक ओंकार राणा ने विभागीय जांच के लिए एक टीम गठित की. जांच में पता चला कि छात्र ने कथित तौर पर जौनपुर के एक स्कूल से 'अजय कुमार' के नाम से हाई स्कूल की परीक्षा दी थी और उसमें फेल हो गया था. आरोप है कि संस्कृत स्कूल में दाखिला लेने से पहले उसके दस्तावेजों में बदलाव किए गए थे.
इस मामले पर ओंकार राणा ने बताया कि यह कार्रवाई विभागीय जांच के दौरान मिले दस्तावेजी सबूतों के आधार पर की गई है. 10 अगस्त के आदेश में यादव के शैक्षणिक रिकॉर्ड को रद्द करने और 1 लाख रुपये का इनाम, टैबलेट, मेडल और सर्टिफिकेट वापस लेने का निर्देश दिया गया है.
(अमितेन्द्र श्रीवास्तव से इनपुट के साथ)
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