मधुबनी के टेंगरार गांव में इन दिनों गुड्डू कुमार कर्ण की खूब चर्चा है. घर-परिवार से लेकर गांव के लोगों तक, हर किसी की जुबां पर एक ही नाम छाया हुआ है. गांव के इस युवक गुड्डू कुमार कर्ण ने UGC-NET 2026 में मैथिली विषय में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है. NET के साथ गुड्डू का JRF के लिए भी चयन हुआ है. गुड्डू की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने किसी बड़े शहर से नहीं, बल्कि मधुबनी के फुलपरास प्रखंड के एक गांव से निकलकर ये बड़ा मुकाम हासिल किया है. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादाई है, जो छोटे शहरों और गांवों में रहकर बड़े सपने देखते हैं.
रिजल्ट आते ही बदल गया घर का माहौल
गुड्डू के पिता मिथिलेश कर्ण और मां रामकुमारी देवी हैं. बेटे की सफलता की खबर परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आई खुशी जैसी है. चूंकि जिस बेटे को परिवार ने अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करते देखा, जब उसी का नाम देशभर में सबसे ऊपर आया तो खुशी स्वाभाविक है. यहीं नहीं, टेंगरार के लोगों ने भी गुड्डू को बधाई दे रहे हैं. क्योंकि उन्होंने ना सिर्फ मां पिता और गांव जिला का नाम रोशन किया है, बल्कि अपनी मातृभाषा मैथिली में कामयाबी पाई है.
मैथिली को बनाया अपना विषय
दरअसल, गुड्डू की कहानी की एक खास वजह है कि उन्होंने मैथिली को अपना विषय बनाया. आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई युवा ऐसे विषय चुनना चाहते हैं, जिनमें उन्हें नौकरी के ज्यादा विकल्प दिखाई देते हैं. गुड्डू ने मैथिली को चुना और उसी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है.यही कारण है कि जिस भाषा को उन्होंने अपनी पढ़ाई का विषय बनाया, उसी में उन्होंने देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया. गुड्डू की ये उपलब्धि मैथिली के विद्यार्थियों के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाली है.
लाखों अभ्यर्थियों के बीच बनाई जगह
जैसा कि जानते हैं UGC-NET देश की बड़ी परीक्षाओं में शामिल है. जून 2026 की परीक्षा 87 विषयों में हुई थी. NTA के आंकड़ों के मुताबिक 7.73 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था, जबकि 6.07 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. इसी परीक्षा में मैथिली विषय से गुड्डू ने NET-JRF में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की. मैथिली के अनारक्षित वर्ग में JRF का कटऑफ 234 अंक रहा. असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए कटऑफ 208 और केवल PhD के लिए 182 अंक दर्ज किया गया है.
गांव के बच्चों के लिए बड़ी सीख
गुड्डू की कहानी को सिर्फ एक परीक्षा के नतीजे के तौर पर देखना शायद ठीक नहीं होगा. उनकी सफलता गांव के उन बच्चों के लिए भी एक उदाहरण है, जो पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन कई बार उन्हें लगता है कि बड़े शहरों के बच्चों को बेहतर मौका मिलता है. गुड्डू ने ये साबित किया है कि शुरुआत कहीं से भी हो सकती है. जरूरी ये है कि लक्ष्य तय हो और उसके लिए लगातार मेहनत की जाती रहे तो सफलता जरूर मिलती है. चूंकि गुड्डू को यह कामयाबी पल भर में नही मिली है. गुड्डू की उपलब्धि में उसका लंबा संघर्ष रहा है. एक सामान्य परिवार के लिए बेटे का देशभर में पहला स्थान हासिल करना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि कई सालों की उम्मीद और मेहनत का परिणाम होता है.
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