NEET PG Cut Off 2026 : NEET PG की तैयारी कर रहे मेडिकल छात्रों के लिए कटऑफ सबसे अहम पड़ावों में से एक होती है. परीक्षा में केवल कम से कम क्वालिफाइंग स्कोर हासिल करना ही काफी नहीं होता, बल्कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में पसंद की सीट पाने के लिए उम्मीदवारों को एडमिशन कटऑफ भी ध्यान में रखनी पड़ती है. दरअसल, NEET PG में दो तरह की कटऑफ होती हैं. इनमें क्वालिफाइंग कटऑफ और एडमिशन कटऑफ शामिल हैं. क्वालिफाइंग कटऑफ पार करने वाला उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए पात्र हो जाता है. जबकि सरकारी कॉलेज में सीट मिलने के लिए कटऑफ कई दूसरे फैक्टर्स पर निर्भर करती है. ऐसे में उम्मीदवारों के लिए ये समझना जरूरी है कि कम से कम कितना स्कोर चाहिए और सरकारी सीट के लिए कॉम्पीटीशन कितना तगड़ा है?
NEET PG में कितनी है क्वालिफाइंग कटऑफ?
NEET PG की क्वालिफाइंग कट-ऑफ अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग होती है. जानकारी के मुताबिक, अनारक्षित (UR) उम्मीदवारों के लिए 50th परसेंटाइल, जबकि SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए 40th परसेंटाइल तय है. वहीं, UR-PwD उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ 45th परसेंटाइल है.
कैटेगरी क्वालिफाइंग परसेंटाइल कट-ऑफ स्कोर
UR 50th परसेंटाइल 360
SC/ST/OBC 40th परसेंटाइल 288
UR-PwD 45th परसेंटाइल 324
यानी दिए गए कट-ऑफ स्कोर के बराबर या उससे ज्यादा स्कोर हासिल करने वाले उम्मीदवार काउंसलिंग प्रोसेस में शामिल होने के योग्य होंगे.
क्वालिफाइंग कटऑफ और एडमिशन कटऑफ में फर्क
क्वालिफाइंग कट-ऑफ और एडमिशन कटऑफ में एक बड़ा अंतर है. क्वालिफाइंग कट-ऑफ पार करना सीट मिलने की गारंटी नहीं है. ये सिर्फ उम्मीदवार को काउंसलिंग के लिए योग्य बनाता है. दूसरी ओर, एडमिशन कट-ऑफ वो लेवल है, जिस पर किसी कॉलेज और स्पेशलिटी में सीट मिल सकती है. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पसंदीदा ब्रांच के लिए कट-ऑफ आमतौर पर ज्यादा कॉम्पिटिटिव होती है.
सरकारी सीट के लिए किन बातों पर निर्भर करती है कट-ऑफ?
NEET PG की एडमिशन कटऑफ हर साल बदल सकती है. इसके पीछे कई महत्वपूर्ण फैक्टर्स होते हैं. इनमें परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या, उपलब्ध मेडिकल सीटों की संख्या, परीक्षा का कठिनाई स्तर और पिछले सालों की कटऑफ शामिल हैं. अगर किसी साल परीक्षा आसान रहती है और ज्यादा उम्मीदवार अच्छा स्कोर हासिल करते हैं, तो कॉम्पीटीशन बढ़ सकता है. इसी तरह सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की पसंद भी काउंसलिंग के दौरान कट-ऑफ पर असर डालती है.
सिर्फ कट-ऑफ नहीं, रैंक पर दें ध्यान
उम्मीदवारों को तैयारी करते समय केवल क्वालिफाइंग मार्क्स का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए. सरकारी कॉलेज और पसंदीदा स्पेशलिटी पाने के लिए जितनी बेहतर रैंक होगी, ऑप्शंस उतने ज्यादा मिल सकते हैं. NEET PG क्वालिफाई करने के बाद उम्मीदवारों को काउंसलिंग प्रोसेस में हिस्सा लेना होता है. इसी दौरान रैंक, कैटेगरी, उपलब्ध सीट और कॉलेज-स्पेशलिटी की पसंद के आधार पर एडमिशन का रास्ता तय होता है.
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