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न मेन्यू के हिसाब से खाना,न पंखे-लाइट...हॉस्टल की बदहाली पर फूटा छात्राओं का गुस्सा, सड़क जाम कर किया विरोध

Students Protest : सूरजपुर के भुवनेश्वरपुर प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 50 छात्राओं ने खराब भोजन, बंद पंखे-लाइट और अव्यवस्थाओं के विरोध में चक्काजाम किया. शिक्षा विभाग के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ.

न मेन्यू के हिसाब से खाना,न पंखे-लाइट...हॉस्टल की बदहाली पर फूटा छात्राओं का गुस्सा, सड़क जाम कर किया विरोध
छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के लिए सरकार प्रति माह भोजन, बिजली-पानी और रखरखाव मद में लाखों रुपये का बजट जारी करती है

Girls Hostel Protest : 21वीं सदी की जेन अल्फा पीढ़ी जो अन्याय या अव्यवस्था के सामने चुप बैठने के बजाय अपने हक की आवाज बुलंद करना बखूबी जानती है. सूरजपुर के रामानुजनगर इलाके के भुवनेश्वरपुर प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में जब छात्राओं के बुनियादी अधिकारों की अनदेखी हुई, तो ये छात्राएं सीधे सड़क पर उतर आईं. हॉस्टल अधीक्षिका की मनमानी, खराब खाना और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर करीब 50 स्कूली छात्राओं ने चक्काजाम कर दिया और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की. सड़क पर कतारबद्ध बैठी इस जेन अल्फा पीढ़ी के तेवर देखकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. 

उमस और अंधेरे में रहना बन चुकी है मंजूरी

छात्राओं के अनुसार हॉस्टल में मेन्यू के हिसाब से खाना नहीं दिया जाता और थाली में जरूरत से कम सब्जी परोसी जाती है. इसके अलावा हॉस्टल के पंखे और लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं. जिससे उमस और अंधेरे में रहना उनकी मजबूरी बन चुका है.  छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार सुप्रीटेंडेंट (Superintendent) से इसकी शिकायत की. लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो जेन अल्फा की इन छात्राओं ने विरोध का यह सशक्त रास्ता चुना और अपनी मांगों को लेकर सड़क पर धरना दे दिया.

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BEO ने सुनी समस्या...फिर खत्म हुआ आंदोलन

छात्राओं के सड़क पर उतरने की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी  को मौके पर भेजा गया. BEO ने छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और हॉस्टल प्रबंधन से बात कर सभी अव्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया. जिसके बाद छात्राओं ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया.

हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए सरकार प्रति माह भोजन, बिजली-पानी और रख-रखाव के लिए लाखों रुपये का बजट जारी करती है. लेकिन इस बजट के बावजूद अगर मासूम छात्राओं को भरपेट अच्छा खाना और चालू पंखे-लाइट जैसी बेसिक सुविधाएं भी न मिलें, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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भुवनेश्वरपुर कन्या छात्रावास का यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संदेश है कि आज की जेन अल्फा पीढ़ी अपने अधिकारों को लेकर बेहद सजग और मुखर है. बता दें कि शिक्षा विभाग के आश्वासन पर फिलहाल छात्राएं वापस लौट चुकी हैं. लेकिन अब देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में कब तक ठोस सुधार करता है, ताकि भविष्य में इन मासूमों को फिर अपने हक के लिए सड़क पर न उतरना पड़े. 

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