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IIT Madras से पढ़े भाई-बहन ने खड़ी की Zoho, जानें राधा और श्रीधर वेम्बू की सफलता की कहानी

श्रीधर वेम्बू ने साल 1996 में 'एडवेंटनेट' (AdventNet) नाम की एक कंपनी शुरू की गई थी. जिसका नाम साल 2009 में बदलकर जोहो कॉरपोरेशन कर दिया गया. आज ये कंपनी 180 देशों में अपनी सेवा दे रही है.

IIT Madras से पढ़े भाई-बहन ने खड़ी की Zoho, जानें राधा और श्रीधर वेम्बू की सफलता की कहानी
राधा ने IIT मद्रास में दाखिला लिया और 1997 में इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन पूरा किया. 

जोहो (Zoho) के फाउंडर राधा और श्रीधर वेम्बू रिश्ते में भाई-बहन हैं. दोनों भाई-बहन ने एक सपना देखा और उसे पूरा करके दिखाया. चेन्नई में जन्म राधा और श्रीधर वेम्बू के पिता मद्रास हाई कोर्ट में स्टेनोग्राफर थे. श्रीधर का जन्में 1968 में हुआ था और राधा का 1972 में हुआ था. दोनों भाई-बहन पढ़ाई में काफी तेज थे. श्रीधर ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद JEE का एग्जाम दिया और इस एग्जाम को पास कर IIT मद्रास में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रिंसटन से MS और PhD की डिग्री हासिल की. राधा भी अपने भाई के नक्शे कदम पर चली. राधा ने भी 12वीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का फैसला लिया. राधा ने IIT मद्रास में दाखिला लिया और 1997 में इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन पूरा किया. 

1996 में शुरू की कंपनी

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद  श्रीधर ने 1994 से सैन डिएगो में क्वालकॉम (Qualcomm) में वायरलेस सिस्टम इंजीनियर के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने खुद का काम शुरू करने का सोचा. साल 1996 में श्रीधर ने 'एडवेंटनेट' (AdventNet) नाम की कंपनी शुरू की. साल 2009 में इस कंपनी का नाम जोहो कॉरपोरेशन कर दिया गया. राधा भी कंपनी में शामिल हुईं और बाद में इसकी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई.

10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स

देखते ही देखते जोहो बिना किसी बाहरी वेंचर फंडिंग के एक ग्लोबल SaaS कंपनी बन गई. इस कंपनी का बेस पहले सिलिकॉन वैली था. जिसे बाद में तमिलनाडु के तेनकासी गांव में शिफ्ट कर दिया. राधा 2007 में जोहो मेल की प्रोडक्ट मैनेजर बनीं और इसी पद पर सेवा दे रही हैं.  इस समय जोहो के 180 देशों में 10 करोड़ से ज़्यादा यूजर्स है.

श्रीधर ने जोहो स्कूल्स शुरू किया, जहां बिना कॉलेज डिग्री वाले छात्रों को इंजीनियर बनने की ट्रेनिंग दी जाती है. 'जोहो यूनिवर्सिटी' में छात्रों का मूल्यांकन एग्जाम या अंकों के आधार पर नहीं किया जाता है. श्रीधर ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में काम के लिए 2021 में पद्म श्री मिला था.

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