भगवान श्री कृष्ण कौन हैं, कृष्ण विशिष्ट क्यों है, कृष्ण का जीवन कैसा है. कृष्ण को लेकर तमाम सवाल हैं और इन सवालों का जवाब ढूंढ़ती एक किताब है, जो कृष्ण के अनेक पहलुओं में से कुछ पहलुओं से जुड़े सवालों का जवाब देती हुई सी दिखाई देती है. “ईकोज ऑफ डिविनिटी” नाम की इस किताब को लिखा है आराधना जौहरी ने. 1980 बैच की यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी रहीं आराधना जौहरी इतिहासकार भी हैं. आराधना जौहरी की इस किताब का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विमोचन किया.
आराधना जौहरी ने रिटायरमेंट के बाद कृष्ण के जीवन के अनेक रंगों को समझने की कोशिश के तहत ये किताब लिखी है. इस किताब की खासियत ये है कि इसके हर पन्ने को खास तौर पर डिजाइन किया गया है. इसके हर प्रसंग को पौराणिकता और इतिहास के साथ साथ वैज्ञानिक तथ्य के साथ भी जोड़ने की कोशिश की गई है.
तीन हिस्सों में बांटी गई है किताब
“ईकोज ऑफ डिविनिटी” दरअसल कृष्ण के माखनचोर वाले दौर से लेकर द्वारका के शासक तक के दौर के अनेक रंगों को बताने की कोशिश का एक इंद्रधनुष हैं. 350 पन्नों वाली इस किताब को मुख्यतः तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहले भाग में श्री कृष्ण के जन्मस्थल ब्रज के समृद्धशालू इतिहास और ब्रज की संस्कृति को उकेरने की कोशिश है. दूसरे भाग में श्री कृष्ण के दिव्य स्वरूप, उनकी ऐतिहासिकता और उनकी लीलाओं का बखान है. तीसरे हिस्से में भगवान कृष्ण से जुड़े पवित्र स्थलों और देश भर में उनकी उपस्थिति की आध्यात्मिक यात्रा का वृतांत मिलता है. इसको लिखने के लिए ख़ुद लेखिका ने ना सिर्फ ब्रज में रहकर साधु संतों से, इतिहासकारों से और ब्रजवासियों से संवाद किया बल्कि 84 कोष की यात्रा करके कृष्ण के जीवन को अनुभव करने की भी कोशिश की.
खंडित मूर्ति की पूजा
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आराधना जौहरी बताती हैं कि उनके परिवार ने हमेशा से भगवान कृष्ण को अपना आराध्य माना. मां जिस कृष्ण की मूर्ति की पूजा करती थीं, वो एक बच्चे के हाथ से गिरकर टूटने के बावजूद परिवार आज भी उस खंडित मूर्ति की ही पूजा करता है. तमाम शुभ अशुभ के दावों के बावजूद कृष्ण की इस खंडित मूर्ति की पूजा के बावजूद आराधना जौहरी का कुछ अमंगल नहीं हुआ. इसी वजह से किताब की शुरुआत उसी मूर्ति की तस्वीर से होती है.
आराधना जौहरी ने अपनी किताब को लिखने के लिए सिर्फ ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का अध्ययन ही नहीं किया बल्कि कृष्ण की मौजूदगी का इतिहास समेटे कई स्थलों का दौरा भी किया. इस दौरे में कृष्ण के बाल रूप से लेकर शासक युग तक के तमाम अहसासों को महसूस कर उसे शब्दों में पिरोने की कोशिश की. इस प्रक्रिया में कुछ दिन या कुछ हफ्ते नहीं बल्कि महीनों लगे. कई किताबों को पढ़ने में कई कई रात रतजगा करना पड़ा. एक लंबे रिसर्च और अनुभव को एक साथ कलमबद्ध करके आराधना जौहरी ने किताब को पूरा किया.
सीएम योगी ने किया विमोचन
ब्रज की धरती पर पहुंचे कृष्णभक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व आईएएस अधिकारी आराधना जौहरी की किताब का विमोचन किया. ये किताब फिलहाल इंग्लिश में है. उम्मीद है आने वाले दिनों में इसका हिंदी समेत अन्य भाषाओं के अनुवाद भी होगा. आराधना जौहरी ने किताब के विमोचन के मौके पर बताया कि भगवान कृष्ण पर किताब लिखने की प्रेरणा ख़ुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी थी. आराधना जौहरी ने इससे पहले उत्तराखंड के 1200 मंदिरों पर भी किताब लिखी थी. उससे पहले लखनऊ के जायकों पर उनकी किताब खूब चर्चा में रही थी. ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने आराधना जौहरी से कहा कि उत्तराखंड के मंदिरों के बार उन्हें ब्रज और कृष्ण पर भी लिखने की कोशिश करनी चाहिए. इसी प्रेरणा से आराधना जौहरी ने “ईकोज ऑफ डिविनिटी” नाम की ये किताब लिखी है.
क्या बताती है किताब?
ये किताब बताती है कि हमारे पूर्वज कृष्ण के जीवन ने समाज के हर तबके को जीवन जीने का सलीका सिखाया. हमारे इस पूर्वज की जिंदगी शरारतों से शुरू होकर प्रेम और राजनीति से लेकर शासन करने के तरीके सिखाती है. इस पूर्वज ने जब जब जो जो किया, वो आज हजारों साल बाद भी उदाहरण बना हुआ है. इस पूर्वज में जब शरारत की तो बेइंतहा की, जब प्रेम किया तो बेइंतहा किया और जब राजनीति किया तो सबको परास्त किया और जब शासन किया तो उनका शासन अनुकरणीय बन गया. उनका नाम और उनका काम आज भी हर इंसान को ना कुछ सीख देता है बल्कि कई रंगों से सराबोर कर देता है.
कृष्ण कौन हैं? ये कान्हा हैं, गोपाल हैं, श्याम हैं, मोहन हैं, माधव हैं, गोविंदा हैं, मुरलीधर हैं, केशव हैं. इनके जितने नाम हैं, उससे कहीं बढ़कर उनके जीवन के काम हैं. कृष्ण को समझना किसी के बूते का नहीं है. वो कृष्ण जो प्रेम भी करते हैं और उलाहनाये भी सहते हैं. वो कृष्ण जो तमाम उलाहनाओं के बावजूद मुस्कुराते हैं. वो कृष्ण जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ता है लेकिन जिस जगह वो जाते हैं, वहां के शासन से एक सीख देते हैं को हजारों साल बाद भी शासन का एक उदाहरण बना हुआ है. कृष्ण वो हैं जिनका इंतजार आज इस कलयुग के दौर में भी है. कृष्ण वो हैं जो माखन भी छुड़ाते हैं, रास भी रचाते हैं, गीता का ज्ञान भी देते हैं, महाभारत का युद्ध भी लड़ते हैं और द्वारका का शासन भी सिखाते हैं. कृष्ण को समझने के लिए आराधना जौहरी की किताब काफ़ी मददगार साबित हो सकती है.
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