- हर्षदीप सिंह एसएसबी में 17 बार असफल रहने के बाद 18वीं कोशिश में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं.
- हर्षदीप के परिवार के तीन सदस्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में सेवा दे रहे हैं.
- हर्षदीप के पिता वायुसेना में वारंट ऑफिसर और बड़े भाई नौसेना में लेफ्टिनेंट के रूप में देश सेवा कर रहे हैं
Success Story Bihar: बिहार के पटना के हर्षदीप सिंह के साथ-साथ उनके परिवार ने भी देशसेवा में इतिहास रच दिया. जहां हर्षदीप सिंह एसएसबी में 17 बार फेल होने के बाद 18वीं कोशिश में भारतीय सेना लेफ्टिनेंट बने हैं, वहीं इनका परिवार बिहार में संभवतया ऐसा पहला परिवार बन गया है, जिसके तीन सदस्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में सेवाएं दे रहे हैं.
27 वर्षीय हर्षदीप सिंह 17 बार कोशिश की. हर बार फेल हुआ तो हर किसी ने कहा कि तुमसे नहीं हो पाएगा. तमाम तानों के बावजूद पटना के हर्षदीप सिंह ने खुद पर भरोसा रखा. हौसला नहीं टूटने दिया. नतीजा यह रहा है कि 5 सितंबर 2026 को गया ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी की पासिंग आउट परेड में हर्षदीप सिंह को भारतीय सेना का हिस्सा बनने का मौका मिला.

हर्षदीप सिंंह ने बिहार के गया OTA में प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया.
फिर भी हौसला नही टूटा
हर्षदीप ने SSB में 17 बार असफलता का सामना किया. हर असफल प्रयास उनके लिए यह तय करने का मौका था कि क्या उन्हें अब अपना लक्ष्य बदल देना चाहिए. लेकिन उन्होंने लक्ष्य नहीं बदला. हर असफलता के बाद फिर तैयारी की और फिर अगले प्रयास के लिए खुद को तैयार किया. आखिरकार 18वीं कोशिश में उन्हें सफलता मिली. इसके बाद उन्होंने बिहार के गया की OTA में प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया.
पिता व भाई भी कर रहे देश सेवा
हर्षदीप के लिए सेना में जाने का सपना केवल उनका अपना सपना नहीं था. उनके घर में पहले से ही वर्दी और देशसेवा का माहौल रहा है . चूंकि उनके पिता भारतीय वायुसेना में वारंट ऑफिसर के तौर पर सेवा दे रहे हैं. बड़े भाई भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट हैं. हर्षदीप की प्रेरणा की एक बड़ी वजह पारिवारिक पृष्ठभूमि रही है. पिता बड़े भाई को वर्दी में देश की सेवा करते देखकर हर्षदीप भी सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने के लिए प्रेरित थे. अब हर्षदीप के सेना में शामिल होने के साथ सिंह परिवार की कहानी और दिलचस्प हो गई है. पिता वायुसेना, बड़ा भाई नौसेना, और हर्षदीप थलसेना. यानि एक ही परिवार के सदस्य भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं से जुड़े हैं.

सॉफ्टवेयर डेवलपर का जॉब छोड़कर इंडियन आर्मी चुनी.
सॉफ्टवेयर डेवलपर का जॉब करते थे हर्षदीप
सेना में अधिकारी बनने से पहले हर्षदीप एक कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम कर रहे थे. उनके सामने एक पेशेवर करियर का विकल्प मौजूद था. इसके बावजूद उन्होंने सेना में अधिकारी बनने के अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा. हर्षदीप की सक्सेस स्टोरी उन युवाओं के लिए प्रेरणादाई है जो किसी परीक्षा या चयन प्रक्रिया में विफलता के बाद अपने लक्ष्य से भटकने लगते हैं. चूंकि हर्षदीप ने अपनी असफलताओं को अंतिम फैसला नहीं माना.
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