NTA Exams Question Paper : NEET, JEE Main और UGC NET जैसी बड़े एग्जाम्स के क्वेश्चन आखिर कौन तैयार करता है? क्या NTA के कर्मचारी ही सवाल लिखते हैं या इसके लिए बाहर से सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स बुलाए जाते हैं? हाल ही में NTA ने अपने पैनल से करीब 600 एक्सपर्ट्स को हटाया है और नए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को शामिल करने की तैयारी शुरू की है. ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों छात्रों की परीक्षा का पेपर आखिर कैसे तैयार होता है और एक सवाल लिखे जाने से लेकर क्वेश्चन पेपर बनने तक वह किन जांचों से गुजरता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
NTA के पेपर कौन तैयार करता है?NTA की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक क्वेश्चन पेपर बनाने का काम किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं होता. इस प्रोसेस में सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स, टेस्ट आइटम राइटर्स, टेस्ट रिव्यूअर्स, एडिटर्स और साइकोमेट्रिशियन जैसे एक्सपर्ट्स शामिल होते हैं. NTA का कहना है कि सवालों को सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स और साइकोमेट्रिशियन मिलकर तैयार करते हैं.
सबसे पहले परीक्षा का मकसद और पेपर का ढांचा तय किया जाता है. यानी किन विषयों से सवाल आएंगे, उनका लेवल क्या होगा और परीक्षा में किस तरह की जानकारी या क्षमता को परखा जाना है. इसके बाद अलग-अलग सब्जेक्ट्स के लिए आइटम राइटिंग कमेटियां काम करती हैं. NTA की ऑफिशियल प्रोसेस के अनुसार, किसी विषय के लिए ऐसी कमेटी में कम से कम 30 आइटम राइटर्स हो सकते हैं.
लेकिन सवाल लिखते ही काम खत्म नहीं हो जाता. हर क्वेश्चन (Question) की कई बार समीक्षा और सुधार किया जाता है. यह देखा जाता है कि सवाल साफ है या नहीं, ऑप्शंस में कोई भ्रम तो नहीं है और सही जवाब वास्तव में सही है या नहीं. सवालों की क्वालिटी और निष्पक्षता की जांच में सांख्यिकीय और साइकोमेट्रिक विश्लेषण भी शामिल होता है.
पेपर बनने के बाद भी होती है जांचजब सवालों को चुनकर पेपर तैयार किया जाता है तो दूसरे विशेषज्ञ भी उसकी समीक्षा करते हैं. रिव्यूअर्स सवालों को स्वतंत्र रूप से हल कर उनके जवाबों की तुलना आंसर की से करते हैं. किसी सवाल या जवाब में अंतर मिलने पर उसे परीक्षा से पहले सुलझाया जाता है. NTA की प्रोसेस में परीक्षा के बाद भी सवालों के प्रदर्शन का सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical analysis) करने का प्रावधान है.
अब हालिया बदलाव के तहत NTA हर प्रश्नपत्र के लिए 4-टियर जांच व्यवस्था ला रहा है. इसके साथ ही करीब 600 एक्सपर्ट्स को पैनल से हटाया गया है और नए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को शामिल करने की तैयारी चल रही है. इनके चयन के लिए भी 4 स्टेज की स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है.
पेपर बनाने वाले को कितनी मिलती है सैलरीबता दें कि पेपर बनाने में 7 से 15 दिन का समय लगता है और उन्हें सालाना लगभग 35,000 से 40,000 रुपये दिए जाते हैं.
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