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चाणक्य IAS एकेडमी पर मेरठ प्रशासन का यू-टर्न, फोन आते ही अफसरों ने कांपते हाथों से उखाड़ दी मिनटों पहले लगाई सील

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने कोचिंग सेंटर पर सील लगाने का काम शुरू किया है. MDA अब तक 40 से ज्यादा कोचिर सेंटर सील कर चुका है. हालांकि इस बीच चाणक्य आईएएस एकेडमी की सील हटाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

चाणक्य IAS एकेडमी पर मेरठ प्रशासन का यू-टर्न, फोन आते ही अफसरों ने कांपते हाथों से उखाड़ दी मिनटों पहले लगाई सील
चाणक्य आईएएस एकेडमी पर लगी सील हटा दी गई. (file photo)

मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की सीलिंग कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में है. स्टार प्लाजा के चाणक्य आईएएस एकेडमी को पहले सील किया गया, फिर कुछ ही मिनटों बाद सील खोल दी गई. आखिर ऐसा क्या हुआ कि MDA को अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ा? क्या कार्रवाई सबके लिए बराबर है या फिर रसूख के आगे नियम बदल जाते हैं? MDA अब तक 40 से ज्यादा कोचिर सेंटर सील कर चुका है. लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद मेरठ में कोचिंग सेंटर्स को सील किया जा रहा है, लेकिन मेरठ के स्टार प्लाजा में चाणक्य आईएएस एकेडमी पर MDA की टीम ने सील लगाई, और कुछ ही देर बाद वही सील उखाड़ भी दी.

"कोचिंग संचालकों में गुस्सा"

एक फोन आया और सारे नियम बदल गए... MDA के अफसरों को पसीना आ गया और कांपते हाथों से जिस सील को कुछ मिनट पहले लगाया था, उसे उखाड़ दिया. इस पूरे घटनाक्रम ने MDA की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर ये रसूखदार कौन था जिसने फोन किया था, जिस लाल रंग से "MDA सील" लिखा गया था, उसे लाल रंग से ही क्रॉस कर दिया गया और सील भी हटा दी गई. इसे लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और उन कोचिंग संचालकों में गुस्सा जिनके संस्थान MDA ने सील कर दिए हैं.

मौके पर मौजूद MDA के जूनियर इंजीनियर बिजेंद्र का कहना है कि संस्थान की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि यहां ऑफलाइन क्लास नहीं चल रही. केवल ऑनलाइन क्लास संचालित हो रही है. इसी आधार पर सील हटाने का फैसला लिया गया. यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है, अगर लिखित आश्वासन के आधार पर चाणक्य आईएएस एकेडमी की सील हट सकती है, तो दूसरे कोचिंग संचालकों को यही राहत क्यों नहीं? आखिर एक ही नियम अलग-अलग संस्थानों पर अलग तरीके से क्यों लागू किया जा रहा है?

पहले सील क्यों लगाई गई?

सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी नाराजगी है. सवाल उठ रहे हैं कि अगर कार्रवाई होनी है तो सब पर समान रूप से हो, और अगर राहत दी जानी है तो उसका भी एक समान मानक होना चाहिए. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है, अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक था तो पहले सील क्यों लगाई गई? और अगर सील लगाना सही था, तो फिर कुछ ही मिनटों में उसे हटाने की ऐसी क्या मजबूरी आ गई? इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ कोचिंग संचालक ही नहीं, बल्कि पूरा शहर कर रहा है.

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