IPS Training Rules: हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में ट्रेनी IPS अधिकारी उदय कृष्ण रेड्डी का मामला इस समय काफी चर्चा में है. साथी महिला ट्रेनी अफसर की ओर से लगाए गए आरोपों और उसके बाद उदय रेड्डी की खुदकुशी की कोशिश ने हर किसी का ध्यान खींचा है. इस घटना के सामने आने के बाद लोगों के मन में SVPNPA की ट्रेनिंग को लेकर कई तरह से सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर नेशनल पुलिस अकादमी में ट्रेनी आईपीएस अफसरों की डेली रूटीन और ट्रेनिंग कैसे होती है. क्या महिला और पुरुष अफसरों को एक साथ ट्रेनिंग दी जाती है या उनके नियम अलग होते हैं और यहां के सख्त नियम क्या कहते हैं.
उदय कृष्ण रेड्डी केस क्या है
हाल ही में ट्रेनी IPS अधिकारी उदय कृष्ण रेड्डी का मामला सुर्खियों में आया. एक महिला ट्रेनी अधिकारी की शिकायत पर उनके खिलाफ हैरेसमेंट का केस दर्ज हुआ. इसके बाद उनके जहर खाने की खबर भी सामने आई. मामला जांच के दायरे में है, लेकिन इस घटना के बाद लोगों के मन में IPS ट्रेनिंग से जुड़े नियमों को लेकर कई तरह के सवाल आने लगे हैं.
क्या महिला और पुरुष ट्रेनी IPS अफसरों की ट्रेनिंग साथ होती है
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद जब कोई कैंडिडेट चाहे वो मेल हो या फीमेल IPS पद के लिए चुना जाता है, तो उसे हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) भेजा जाता है. अकादमी का सबसे बेसिक और मजबूत नियम यह है कि जेंडर के आधार पर किसी भी ट्रेनी के साथ कोई भेदभाव या रियायत नहीं की जाती है. पुरुष हो या महिला अफसर, दोनों को एक ही बैच में रखा जाता है. दोनों एक ही क्लासरूम में कानून की पढ़ाई करते हैं. दोनों सुबह एक ही मैदान में परेड, पीटी और रनिंग करते हैं.
IPS ट्रेनिंग में नो जेंडर डिस्क्रिमिनेशन
SVPNPA के मैनुअल के अनुसार, अकादमी में कदम रखते ही हर किसी की पहचान सिर्फ ऑफिसर ट्रेनी (Officer Trainee) से होती है. यहां किसी को महिला या पुरुष मानकर छूट नहीं मिलती है. महिला अफसरों को भी पुरुषों के बराबर ही भारी वजन (पिट्ठू बैग) लेकर 30 किलोमीटर लंबी पैदल मार्च करनी होती है. AK-47 चलाना हो, पिस्टल से सटीक निशाना लगाना हो या निहत्थे हाथ-पैर से दुश्मनों का मुकाबला करना (Unarmed Combat) हो, दोनों को एक जैसी ही सख्त ट्रेनिंग दी जाती है. हॉर्स राइडिंग (Equitation), स्विमिंग और कठिन रास्तों पर मैप रीडिंग जैसे टास्क भी सभी के लिए अनिवार्य होते हैं.
क्लासरूम और इनडोर स्टडीज का शेड्यूल
1. मैदान में पसीना बहाने के अलावा ट्रेनी अफसरों को दिमागी रूप से भी बेहद मजबूत बनाया जाता है. भारतीय न्याय संहिता (BNS), साक्ष्य अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया से जुड़ी धाराओं को बारीकी से सिखाया जाता है.
2. डिजिटल अपराध यानी साइबर क्राइम, फिंगरप्रिंट की जांच और क्राइम सीन से सबूत कैसे जुटाए जाते हैं, इसकी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है.
3. क्लासरूम में सभी ऑफिसर एक साथ बैठते हैं और उनके बीच टीमवर्क और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए ग्रुप प्रोजेक्ट्स दिए जाते हैं.
4. SVPNPA में अनुशासन सबसे टॉप पर है. ट्रेनिंग के दौरान हर अफसर पर 'ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स' लागू होते हैं.
5. चाहे परेड का परफॉर्मेंस हो या इनडोर एग्जाम, पुरुष और महिला अफसरों के पासिंग मार्क्स और ग्रेडिंग का स्केल एक ही होता है.
सख्त डिसिप्लिन और ट्रेनिंग में निलंबन का नियम
अगर कोई ट्रेनी अनुशासनहीनता, बिना बताए छुट्टी लेने, सहकर्मियों से बदसलूकी या किसी भी तरह के आपराधिक या आपत्तिजनक व्यवहार में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाती है. नियम इतने कड़े हैं कि गंभीर शिकायत या लगातार खराब प्रदर्शन की स्थिति में ट्रेनी को बैच से पीछे (Relegate) किया जा सकता है या सर्विस से डिस्चार्ज (Deferment) तक किया जा सकता है.
मेडिकल और लीव रूल्स
ट्रेनिंग के दौरान रूटीन लीव मिलना बेहद मुश्किल होता है. अगर कोई ट्रेनी अफसर बीमार होता है, तो अकादमी के अंदर ही हॉस्पिटल की व्यवस्था है. सिर्फ विशेष मेडिकल कंडीशन या मातृत्व (Maternity Leave) के मामलों में ही नियमों के तहत तय समय के लिए छूट या अगली बैच के साथ ट्रेनिंग पूरी करने की अनुमति दी जाती है.
महिला-पुरुष दोनों ही अफसर एक जैसे
SVPNPA के मैनुअल के अनुसार, सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी का मुख्य मकसद देश को ऐसे लीडर्स देना है जो पूरी निष्पक्षता, साहस और ईमानदारी से कानून का राज कायम रख सकें. यही वजह है कि जब एक महिला IPS अफसर मैदान में उतरती है, तो वह किसी भी मायने में अपने पुरुष साथी अफसर से कम नहीं होती है, क्योंकि दोनों ने एक ही जगह से निकले होते हैं और एक जैसी ही ट्रेनिंग करते हैं.
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