IIT में एडमिशन के लिए एक बार फिर रेस शुरू होने वाली है. जल्द ही JEE Main का रजिस्ट्रेशन शुरू होगा और फिर लाखों छात्र तैयारी के लिए कमर कस लेंगे. हालांकि हर साल इन लाखों छात्रों में से कुछ हजार को ही IIT या फिर अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज मिल पाते हैं. ऐसे में जो छात्र सफल नहीं हो पाते, उन्हें ड्रॉप ईयर लेना होता है. क्योंकि 12वीं के बाद JEE Advanced देने के दो ही मौके मिलते हैं. अब छात्रों की मांग है कि इसके कम से कम तीन मौके दिए जाने चाहिए, जिसे लेकर IIT कानपुर के डायरेक्टर ने भी बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा है कि आने वाले कुछ सालों में इस तरह का बदलाव किया जा सकता है.
JEE में सुधार की जरूरत
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए IIT कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने साफ किया कि तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जा रहा है, लेकिन आगे अटेंप्ट बढ़ाए जाने पर फैसला लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि ये परीक्षा अब पूरी तरह से कोचिंग पर निर्भर हो गई है, ऐसे में सुधारों की जरूरत है. यानी आने वाले एक या दो सालों में छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है.
छात्रों की क्या है मांग?
फिलहाल छात्रों को लगातार दो साल तक ही जेईई एडवांस्ड देने का मौका दिया जाता है, जिसे बढ़ाने की मांग हो रही है. इसके लिए 12 हजार से ज्यादा छात्रों ने एक याचिका पर साइन भी किए हैं. इसमें मांग की गई है कि या तो तीन अटेंप्ट की व्यवस्था हो या फिर तीन सालों में से कम से कम दो मौके दिए जाएं.
किसे फायदा और किसे नुकसान?
इस पूरे मामले को लेकर आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर ने कहा कि तीसरे अटेंप्ट के फायदे और नुकसान दोनों हैं. उन्होंने बताया कि इससे कुछ ग्रामीण छात्रों को फायदा जरूर हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ दूसरा ड्रॉप ईयर लेने वालों की संख्या भी बढ़ जाएगी. दो साल बर्बाद करने वाले छात्रों पर मेंटल प्रेशर ज्यादा होगा और कोचिंग पर निर्भरता भी बढ़ेगी. ऐसे में इसे बैलेंस करने की जरूरत है.
नए विकल्प तलाश रहे IITs
देशभर के आईआईटी अब इस समस्या से निपटने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. इसमें छात्रों को सिर्फ उनके JEE स्कोर की बजाय दूसरे तरीकों से भी एडमिशन देने की तैयारी हो रही है. इस दिशा में कदम बढ़ाना भी शुरू किया जा चुका है. इस साल आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर शुरू किए गए साइबर सिक्योरिटी के कोर्स में जेईई एडवांस्ड का स्कोर नहीं मांगा गया था. इसका मकसद कोचिंग पर निर्भरता कम करना और छात्रों की मेंटल हेल्थ को ठीक रखना है.
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