देश के कई छात्रों का सपना होता है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में दाखिला लेकर अपना एक उज्जवल भविष्य बनाने का. बच्चे जेईई एग्जाम क्रैक करने के लिए 10वीं क्लास से ही कोचिंग लेने लग जाते हैं. सालों की कोचिंग लेने के बाद बस इसी उम्मीद से जेईई एग्जाम देते हैं, ताकि ये क्रैक हो जाए और IIT में दाखिला लेने का रास्ता खुल जाए. इस बीच एक ऐसी कहानी भी फेमस हो रही है, जहां एक शख्स ने जानबूझकर IIT का एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं किया. 'ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे' की एक पोस्ट में ऋषभ नाम के एक लड़के की कहानी छपी है. जिसमें ऋषभ ने दावा किया है कि उन्होंने जानबूझकर IIT का एंट्रेंस एग्जाम नहीं निकाला. ऋषभ के अनुसार एग्जाम देते हुए उन्होंने जानबूझकर गलत आंसर पर निशान लगाए.
एक सवाल ने बदल दी जिंदगी
ऋषभ ने बताया कि वो घर के सबसे बड़े बेटे थे. उनका भविष्य पहले से तय किया गया था. स्कूल में साइंस, इंजीनियरिंग, MBA और एक कॉर्पोरेट जॉब. हर फैमिली के फक्शन में ऐसे व्यक्ति की कहानियां होती थी, जिन्होंने IIT क्रैक किया या कोई अच्छी सैलरी वाली नौकरी कर रहे हों, लेकिन उन लोगों से मिलकर ऋषभ के मन में हमेशा एक ही सवाल आता था. अगर मंजिल खुशी है, तो वहां पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति खुश क्यों नहीं लगता? इस एक सवाल ने ही ऋषभ की जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया.
कॉर्पोरेट नौकरी नहीं आई पसंद
ऋषभ ने अपने जीवन को एक नई दिशा देने की सोची. इंजीनियरिंग की जगह ऋषभ ने आर्ट्स की पढ़ाई करने का फैसला किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद ऋषभ को कॉर्पोरेट नौकरी भी मिली, लेकिन उनका मन नहीं लगा. उन्होंने नौकरी छोड़ दी और तीन महीने तक अपनी रॉयल एनफील्ड से स्पीति और लद्दाख घूमने चले गए. इस समय ऋषभ बीर में रहते हैं. लेखक और फोटोग्राफ़र के तौर पर काम कर रहे हैं. ऋषभ का एक ही मकसद है. जिंदगी में खुश रहना और इसी सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं.
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