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सरकार ने किया CBSE के डिजिटल मूल्यांकन का बचाव, कहा- 'OSM ही भविष्य'

CBSE के 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल 1 जून से शुरू होने जा रहा है. पोर्टल शुरू होते ही छात्र वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे.

सरकार ने किया CBSE के डिजिटल मूल्यांकन का बचाव, कहा- 'OSM ही भविष्य'
COEMPT Eduteck कंपनी का चुनाव कई राउंड की बिडिंग के बाद ही किया गया था.

केंद्र सरकार ने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि टेक्नोलॉजी-आधारित मूल्यांकन की ओर यह बदलाव जारी रहेगा. अधिकारी ने NDTV को बताया, "AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ, समय के साथ पारंपरिक मैनुअल असेसमेंट तरीकों पर निर्भरता कम हो जाएगी." यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई छात्रों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम  पर सवाल खड़े किए हैं. कई सारे छात्र ऐसे भी हैं जिन्हें री-इवैल्यूएशन प्रोसेस के दौरान गलत आंसर शीट मिलीं है. जबकि कुछ छात्रों को आंसर शीट की धुंधली स्कैन्ड कॉपी मिली है. इसके अलावा पोर्टल क्रैश और असामान्य पेमेंट डिमांड की शिकायत भी सामने आई है. इन विवादों के बीच भी सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का बचाव सरकार कर रही है. 

OSM प्रोसेस "ट्रांसपेरेंट और फुलप्रूफ" 

हालांकि सरकारी सूत्रों ने माना कि CBSE के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल पर "अनऑथराइज्ड हमले" हुए थे, जिससे कक्षा 12 के छात्रों को अपनी आंसर शीट की स्कैन की हुई कॉपी के लिए आवेदन करने में बड़ी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. एक सीनियर अधिकारी ने कहा, "पोर्टल कई बार डाउन हुआ. इसमें टेक्निकल कमियां थीं. IIT मद्रास और IIT कानपुर भी इस पहलू को देख रहे हैं. अधिकारियों ने कहा कि पेमेंट गेटवे की दिक्कतें अब हल हो गई हैं. चार पब्लिक सेक्टर बैंकों - बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक - के गेटवे पर टेस्ट किए गए और वे आसानी से हो गए." रुकावटों के बावजूद, अधिकारियों ने डिजिटल इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क का बचाव करते हुए जोर देकर कहा कि OSM प्रोसेस "ट्रांसपेरेंट और फुलप्रूफ" बना हुआ है.

COEMPT Eduteck को इस वजह से दिया गया कॉन्ट्रैक्ट

CBSE के COEMPT Eduteck को डिजिटल मूल्यांकन का कॉन्ट्रैक्ट देने के फैसले पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए अधिकारियों ने कहा, कंपनी का चुनाव कई राउंड की बिडिंग के बाद ही किया गया था. बिडिंग के पहले राउंड में तकनीकी विशेषज्ञता को 70 प्रतिशत और वित्तीय क्षमता को 30 प्रतिशत वेटेज दिया गया था. उस राउंड में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ही एकमात्र ऐसी कंपनी थी जो क्वालिफ़ाई कर पाई थी. नियमों के मुताबिक, सिर्फ़ एक बिड को स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे रद्द करना पड़ा.

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अधिकारियों ने बताया कि बिडिंग के दूसरे राउंड में भी कोई सफल बिडर नहीं मिल पाया. तीसरे राउंड में, फ़ाइनेंशियल बिड के दौरान, COEMPT ने टैक्स मिलाकर प्रति आंसर-शीट 24.75 रुपये का रेट दिया, जबकि TCS ने टैक्स मिलाकर लगभग 65 रुपये का रेट दिया. दोनों के रेट में काफ़ी अंतर था. हमें सबसे कम रेट देने वाले बिडर को ही कॉन्ट्रैक्ट देना होता है, इसलिए COEMPT को चुना गया."

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