केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कॉपियों की डिजिटल जांच यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर साफ कहा कि कुछ तो दिक्कत हैं, जिन्हें देखना जरूरी है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की. कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई है कि सीबीएसई की कॉपी जांच के लिए पारदर्शी और स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से सख्त सवाल किए.
सुप्रीम कोर्ट ने की ये टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "छोटे बच्चों की निराशा को देखिए." बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम नहीं चाहते कि आप विरोधी रुख अपनाएं, कुछ समस्याएं तो हैं." इसके बाद कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से इस मामले में कोर्ट की मदद करने के लिए कहा. कोर्ट ने उनसे यह बताने के लिए कहा है कि केंद्र सरकार या संबंधित अधिकारियों ने इस विषय में अब तक क्या कदम उठाए हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिया कि वे इस मामले में कोर्ट की मदद करेंगे.
याचिका में क्या-क्या मांगे हैं?
- कॉपी जांच (OSM) की इस प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाई जाए.
- जिन छात्रों ने यूनिवर्सिटी या कॉलेज में प्रवेश परीक्षा पास कर ली है या प्रोविजनल एडमिशन ले लिया है, उन्हें बोर्ड के न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट दी जाए.
क्या है OSM सिस्टम?
CBSE की तरफ से पहली बार 12वीं की कॉपियों की फिजिकल यानी पेन-पेपर मोड पर चेकिंग करने की बजाय डिजिटल चेकिंग हुई. इसे ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम कहा गया. बोर्ड ने बताया कि ये काफी अच्छा सिस्टम है और इससे छात्रों को फायदा होगा. हालांकि रिजल्ट जारी होने के बाद ब्लर कॉपी, कॉपियों की अदला-बदली और नंबर कम होने की शिकायतें आईं. पूरे मामले को लेकर बोर्ड को खूब फजीहत का सामना करना पड़ा.
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