दिल्ली के सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में छात्रों के रहने की सुरक्षा और सुविधाओं पर फिर सवाल खड़े हुए हैं. हर साल बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं, लेकिन सवाल है कि उनके रहने की व्यवस्था कितनी सुरक्षित और पर्याप्त है?आधिकारिक 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय में कुल 2,51,474 नियमित छात्र हैं. इनमें 2,10,907 स्नातक, 34,520 स्नातकोत्तर और 6,047 छात्र सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और अन्य श्रेणियों में हैं. इसके मुकाबले DU के पास सिर्फ 20 हॉस्टल हैं.
20 यूनिवर्सिटी हॉस्टल, हजारों छात्रों की जरूरत
DU के 20 हॉस्टलों में 10 छात्राओं, 8 छात्रों और 2 कोएड हॉस्टल शामिल हैं. इनकी क्षमता लगभग 3,500 से ज्यादा छात्रों की है. वहीं, 22 संबद्ध कॉलेजों के हॉस्टलों में करीब 3,457 सीटें हैं.
हर 36 छात्रों पर एक हॉस्टल सीट
विश्वविद्यालय और कॉलेज हॉस्टलों को मिलाकर करीब 6,957 सीटें उपलब्ध हैं. यानी DU के कुल नियमित छात्रों में सिर्फ लगभग 2.77 फीसदी को ही संस्थागत हॉस्टल सुविधा मिल सकती है. सरल शब्दों में कहें तो हर 36 छात्रों पर सिर्फ एक हॉस्टल सीट उपलब्ध है.

मजबूरी में PG और किराए के कमरे
हॉस्टल की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG, प्राइवेट हॉस्टल और किराए के कमरों पर निर्भर हैं. दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए, जिनका दिल्ली में कोई स्थानीय सहारा नहीं है, PG या किराए का कमरा अक्सर मजबूरी बन जाता है. दिल्ली के छात्र भी कॉलेज से दूरी और लंबे सफर से बचने के लिए कैंपस के आसपास रहना पसंद करते हैं.
कॉलेज हॉस्टल भी मांग से काफी पीछे
हॉस्टल की कमी सिर्फ DU के स्तर पर नहीं है. कई कॉलेज अपने हॉस्टल चलाते हैं, लेकिन सीटों की संख्या छात्रों की मांग के मुकाबले काफी कम है. दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी की छात्रा टुबा ने NDTV से कहा कि छात्रों को साफ वॉशरूम, बेहतर लाइब्रेरी, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित कैंपस जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.
महंगे सुरक्षित PG और सीमित बजट के बीच जूझ रहे छात्र
निजी आवास पर बढ़ती निर्भरता छात्रों को किराया, कॉलेज से दूरी और सुरक्षा के बीच चुनाव करने पर मजबूर करती है. सत्य निकेतन में गिरी इमारत करीब 50 साल पुरानी बताई गई थी और इसमें PG चल रहा था. हादसे के बाद MCD की जांच में कथित तौर पर बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, अनधिकृत बेसमेंट निर्माण और फायर NOC नहीं होने जैसी कमियां सामने आईं.
200 से ज्यादा निजी हॉस्टल जांच के घेरे में
हादसे के बाद दिल्ली में निजी हॉस्टल और PG की जांच तेज हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक 200 से ज्यादा निजी हॉस्टलों की पहचान खतरनाक या जोखिम वाले आवास के तौर पर की गई है. असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी है—अगर छात्रों को PG खाली करने को कहा जाता है, तो वे जाएंगे कहां?
नया कमरा ढूंढना भी बड़ी चुनौती
PG खाली करने पर छात्रों को अचानक नया कमरा ढूंढना पड़ता है. इसके साथ नया सिक्योरिटी डिपॉजिट, ब्रोकरेज और एडवांस किराए का अतिरिक्त बोझ भी आता है. पहले से सीमित बजट में रहने वाले छात्रों के लिए यह बड़ी परेशानी बन सकती है.
सुरक्षित विकल्प कब?
सत्य निकेतन हादसे ने सिर्फ असुरक्षित इमारतों की समस्या नहीं दिखाई, बल्कि सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की कमी को भी सामने रखा है. असुरक्षित PG को बंद करना जरूरी है, लेकिन उसके साथ छात्रों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती विकल्प तैयार करना भी उतना ही जरूरी है.
अगर कोई असुरक्षित PG बंद हो जाता है, तो समस्या खत्म नहीं होती. छात्र को फिर भी रहने के लिए एक जगह चाहिए. दिल्ली के सामने अब सवाल सिर्फ असुरक्षित PG हटाने का नहीं, बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने का है.
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