सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों के रहने की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अभी तक मृतकों की संख्या 7 पहुंच चूकी है. राजधानी में छात्रों की बदहाल स्थिति और असुरक्षित आवास का मुद्दा नया नहीं है. NDTV हादसे के कई दिन पहले से ही छात्रों के रहने, खाने, पढ़ने और सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर लगातार ग्राउंड रिपोर्ट कर रहा है. लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. यहां रहने वाले छात्रों ने अपनी समस्याएं एक बार फिर हमें बताईं और कहा कि कई बार आवाज उठाने का बावजूद इनमें सुधार नहीं हो रहा है.
NDTV ने दिखाई थी मुखर्जी नगर की तस्वीर
कुछ दिन पहले NDTV ने मुखर्जी नगर में ग्राउंड रिपोर्ट की थी. इस दौरान UPSC और SSC की तैयारी कर रहे छात्रों से बात कर उनके रहने, खाने, पानी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को सामने लाया गया था. रिपोर्ट के दौरान सांसद मनोज तिवारी से भी बात हुई थी. उन्होंने कहा था कि जिन छात्रों को परेशानी है, वे आकर अपनी समस्या बता सकते हैं. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या दूसरे राज्यों से दिल्ली पढ़ने आए छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ उनकी शिकायत करने की क्षमता पर निर्भर होनी चाहिए?
छात्र शिकायत करने से क्यों बचते हैं?
दूसरे राज्यों से दिल्ली आए अधिकांश छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं. उनके सामने पढ़ाई, खर्च और भविष्य की चिंता पहले से है. ऐसे में कई छात्र प्रशासनिक शिकायत, आंदोलन या किसी विवाद में पड़ने से बचना चाहते हैं. लेकिन सवाल यह है कि अगर छात्र खुद शिकायत नहीं कर पा रहे हैं, तो क्या प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? क्या प्रशासन को इन इलाकों में PG और किराये के कमरों की स्थिति की नियमित जांच नहीं करनी चाहिए?
NDTV फिर पहुंचा मुखर्जी नगर, क्या बदली जमीनी तस्वीर?
सत्य निकेतन हादसे के बाद NDTV ने एक बार फिर मुखर्जी नगर का रुख किया. इस बार उन छात्रों से भी बात की गई, जिनसे पहले हमारी बातचीत हो चुकी थी. मकसद साफ था, क्या पिछली रिपोर्ट के बाद हालात में कोई बदलाव आया या तस्वीर जस की तस है?

SSC की तैयारी कर रहीं इन्नू बोलीं- कोई संज्ञान नहीं लिया गया
SSC की तैयारी कर रहीं इन्नू से NDTV पहले भी बात कर चुका है. इस बार जब उनसे पूछा गया कि क्या पानी और रहने से जुड़ी समस्याओं में कोई सुधार हुआ, तो उनका कहना था कि अब तक किसी ने उनकी समस्या का कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया है. यानी जिन समस्याओं को पहले सामने लाया गया था, उनमें से कई आज भी बनी हुई हैं.
गोंडा से दिल्ली आए रितिक ने दिखाया कमरे का हाल
UPSC की तैयारी कर रहे गोंडा निवासी रितिक ने NDTV को अपने कमरे की स्थिति दिखाई. उनका कहना था कि इतने छोटे कमरे में दो लोग रहते हैं और कमरे में बैठकर पढ़ाई करना भी मुश्किल हो जाता है.
धर्मेंद्र का सवाल - क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?
मुखर्जी नगर में रहने वाले धर्मेंद्र ने भी छात्रों की समस्याओं को सामने रखा. उनका कहना था कि रहने की दिक्कत तो है ही, लेकिन सुरक्षा मानकों का भी ध्यान नहीं रखा जाता. उन्होंने बिजली के बिल को लेकर भी मनमानी वसूली का आरोप लगाया. धर्मेंद्र ने सीधा सवाल उठाया - क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?

रवि ने दिखाया सीलन से भरा कमरा
मुखर्जी नगर में रहने वाले रवि ने NDTV को अपने कमरे की स्थिति दिखाई. कमरे की दीवारों पर सीलन थी और पूरा कमरा खराब हालत में नजर आया. ऐसे कमरों में लंबे समय तक रहने वाले छात्रों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ता है. ये सिर्फ एक कमरे की कहानी नहीं है. मुखर्जी नगर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र PG और छोटे कमरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.
PG मालिकों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल
छात्रों का आरोप है कि PG संचालकों की जवाबदेही तय नहीं है. उनका कहना है कि जब वे किसी समस्या की शिकायत करते हैं तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया जाता है कि पसंद नहीं है तो PG बदल दीजिए. छात्रों का ये भी आरोप है कि इलाके में PG संचालकों का एक मजबूत नेटवर्क है और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती.
छात्रों की सुध कौन लेगा?
आगरा विश्वविद्यालय के इतिहास के गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके राहुल जादौन ने भी मुखर्जी नगर के हालात को लेकर चिंता जताई. राहुल से हमने पहले भी बात की है. उनका कहना है कि हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता. साथ ही उन्होंने खाने की समस्या को लेकर भी चिंता जताई.
सवाल अब सीधा है - क्या प्रशासन इन छात्रों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर किसी और बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी?
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