- बिहार के छोटे गांव बासोपट्टी के रहने वाले नसीन कुमार निशांत 2021 में BBSC क्रैक कर SDM बने थे थे
- निशांत ने 20 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया, जिसके बाद उनका ये सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा
- BHU से IIT करने के बाद भी प्लेसमेंट नहीं लिया और BBSC का फॉर्म भर पढ़ाई शुरू कर दी
Nasin kumar nishant success story: बिहार के SDM नसीन कुमार निशांत का कुर्सी तक पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. उनका बचपन बहुत ही संघर्षों भरा था. लोअर मिडिल क्लास परिवार में पैदा होने की वजह से उन पर बचपन से ही पिता की उम्मीदों का बहुत दबाव था. निशांत ने 20 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया. उस पल ने उनकी जिंदगी को एक दम से बदलकर रख दिया. एक तरफ परिवार की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ तानों का बोझ.
निशांत बिहार के सीतामढ़ी जिले में छोटे से गांव बासोपट्टी के रहने वाले हैं. उनका जन्म 13 अप्रैल 1996 को हुआ था. उनके पिता का नाम महेंद्र पासवान और मां का नाम मंजू कुमारी है. चार भाइयों में वह सबसे छोटे हैं. पांचवीं क्लास तक सरकारी स्कूल में पढ़े, लेकिन पढ़ने में अच्छे होने की वजह से टीचर्स के कहने पर पिता ने उनका दाखिला प्राइवेट स्कूल में करवा दिया.7वीं क्लास में 99.96 प्रतिशत अंक लाए. बड़े होने पर IIT का सपना देखा.
IIT की कोचिंग के लिए नहीं थे पैसे
आईआईटी का एग्जाम दिया लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ. फिर तैयारी के लिए कोटा गए.लेकिन कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे. पास सिर्फ 35 हजार रुपये थे और सपने बड़े. फिर सबसे सस्ते कोचिंग सेंटर में दाखिले के लिए पहुंचे, लेकिन उसकी फीस भी 76 हजार रुपये थी. इतने पैसे नहीं थे तो टीचर से दाखिले के लिए मिन्नतें कीं. रोते-रोते टीचर के पैर पकड़ लिए. फिर उन्होंने 1 महीने फ्री कोचिंग दी, पहले टेस्ट में 211 नंबर आते ही टीचर ने पढ़ाई फ्री कर दी. आईआईटी में बहुत अच्छी रैंक आई. जिसके बाद उनका सिलेक्शन IIT BHU में हो गया.लेकिन पिता खुश नहीं थे. उन्होंने कहा कि IAS बनते तो अच्छा होता. वे हमेशा यही कहते कि आईआईटी से क्या होता है. टॉपर होने के बाद भी निशांत ने IIT से प्लेसमेंट नहीं लिया. वह कुछ और करना चाहते थे.

20 साल की उम्र में मां को खोया, टूट गए
2017 में अचानक गांव से कॉल आया कि मां की मौत हो गई है.तब वह 20 साल के थे. वह टूट गए थे. मां ही फीस भरती थीं. वह सोचने लगे कि अब कौन फीस भरेगा, पढ़ाई कैसे चलेगी. निशांत के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई. एक दम से सारे सपने टूट गए.फिर उन्होंने IAS करने के बारे में सोचा. 2018 में बीपीएसस का एग्जाम दिया उसका रिजल्ट लेट तीन साल तक आया ही नहीं. लोगों ने ताने देना शुरू कर दिया. निशांत को पड़ोसियों के ताने सुनने पड़े.लेकिन वह टूटे नहीं बल्कि अपनी दृढ़ शक्ति को और मजबूत किया. उन्होंने अपनी मेहनत से ताने देने वालों की बोलती बंद कर दी.
BBSC परीक्षा पहली कोशिश में क्रैक की
कहते हैं ना जहां चाह होती है वहां राह खुद ही निकल आती है. निशांत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. तीन साल बाद साल 2021 में रिजल्ट आया और एसडीएम बन गए. BPSC क्रैक कर साल 2021 में 24 साल की उम्र में बिहार के सबसे युवा SDM बन गए. निशांत ने 2021 में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में पहली ही कोशिश में 140वीं रैंक प्राप्त कर अपने गांव का नाम रोशन कर दिया.

3 साल लेट हुआ रिजल्ट तो पड़ोसियों ने ताने दिए
जब वह प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे थे तब भी रिश्तेदारों में खूब ताने दिए. लेकिन निशांत टूटे नहीं. उन्होंने अपना परिश्रम जारी रखा. BPSC परीक्षा में 3 साल की देरी से वह एक पल के लिए डगमगाए लेकिन अपना धैर्य नहीं छोड़ा. वह लगे रहे और अपने लक्ष्य से नहीं हटे. उन्होंने लोगों को उनके ताने का जवाब अपनी सफलता से दिया.
मेहनत और विश्वास ने बने SDM
कई सालों की मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर निशांत ने पहली ही कोशिश में वो सफलता हासिल की जिसका उन्होंने सपना देखा था. महज 22 साल की उम्र में बिहार के SDM बनकर उन्होंने अपने परिवार ही नहीं बल्कि राज्य का भी नाम रोशन कर दिया. उनकी इस कामयाबी ने उनको ताने देने वालों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया. निशांत उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो समाज के तानों से परेशान होकर टूट जाते हैं.
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