NEET पेपर लीक के बाद देशभर में हुए प्रदर्शन और छात्रों के विरोध के बाद संसद में इसे लेकर एक बिल लाया गया, जो अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन चुका है. एंटी पेपर लीक कानून में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रावधान हैं. इस कानून के तहत पेपर लीक के आरोपियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना देना पड़ सकता है. इस कानून में कई तरह के जरूरी प्रावधान हैं, जिन्हें छात्रों को जानना जरूरी है. आज हम आपको बताएंगे कि इस कानून के तहत कौन-कौन सी परीक्षाएं आती हैं.
एंटी पेपर लीक कानून के तहत कौन सी परीक्षाएं आएंगीं?
पेपर लीक को लेकर बने इस कानून के तहत तमाम जरूरी परीक्षाओं को शामिल किया गया है. इसमें केंद्र की तरफ से आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं को शामिल किया गया है. पेन-पेपर या फिर कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं इसमें शामिल हैं.
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS)
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सभी परीक्षाएं
- केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग और उनसे जुड़े या अधीनस्थ कार्यालयों की तरफ से कर्मचारियों की भर्ती के लिए ली जाने वाली परीक्षाएं
- केंद्र सरकार की तरफ से अधिसूचित की गई कोई अन्य अथॉरिटी या संस्था
कानून के दायरे में कौन-कौन आएगा?
एंटी पेपर लीक कानून के दायरे में कोई भी आरोपी व्यक्ति या फिर समूह आ सकता है. इसके अलावा सर्विस प्रोवाइडर यानी परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां, इन एजेंसियों के वरिष्ठ प्रबंधक/अधिकारी या फिर अन्य कोई भी संस्थाएं कानून के दायरे में हैं. साथ ही परीक्षा से जुड़े सरकारी कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे.
सरकार की तरफ से बताया गया है कि इस कानून का मकसद सरकारी/सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता लाना है. साथ ही, युवाओं को यह भरोसा दिलाना है कि उनकी ईमानदारी और मेहनत का सही फल मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित है. इस कानून का मकसद पैसों या गलत फायदे के लिए धांधली करने वाले व्यक्तियों, गिरोहों या संस्थाओं पर कड़ी कानूनी रोक लगाना है.
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