देश में हुए तमाम बड़े पेपर लीक के बाद सरकार ने इसे लेकर संसद में बिल पेश किया और अब ये एंटी पेपर लीक कानून बन चुका है. इस बार कानून में कई तरह के सख्त प्रावधान रखे गए हैं. इसमें बताया गया है कि कौन से लोग और परीक्षाएं इस कानून के तहत आएंगीं. साथ ही कानून में विस्तार से इस बात को भी बताया गया है कि इसके तहत कौन-कौन सी गड़बड़ियों को अपराध माना गया है. इस लिस्ट में फर्जी परीक्षाओं का जिक्र भी किया गया है, ऐसे में कई लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं कि क्या अब परीक्षा से पहले मॉक टेस्ट भी नहीं कराए जा सकते हैं? आइए हम आपको बताते हैं कि कानून में किस तरह की फर्जी परीक्षाओं का जिक्र किया गया है.
इन चीजों पर मिलेगी सजा
- क्वेश्चन पेपर, आंसर की या OMR शीट को लीक करना या अनधिकृत रूप से अपने पास रखना
- परीक्षा के दौरान किसी अनधिकृत व्यक्ति की तरफ से प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराना
- उम्मीदवारों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गलत तरीके से मदद करना
- OMR शीट या आंसर शीट्स के साथ छेड़छाड़ करना
- मूल्यांकन (Assessment) प्रक्रिया में फेरबदल करना
- मेरिट लिस्ट या शॉर्टलिस्टिंग से जुड़े दस्तावेजों से छेड़छाड़ करना
- सुरक्षा नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करना
- कंप्यूटर नेटवर्क, सिस्टम या रिसोर्स के साथ छेड़छाड़ करना
- रोल नंबर, सीटिंग अरेंजमेंट या परीक्षा की तारीख/शिफ्ट में हेराफेरी
- परीक्षा अधिकारियों को रोकना या परीक्षा में किसी भी तरह की बाधा डालना
- ठगी के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी परीक्षा आयोजित करना या फर्जी एडमिट कार्ड/ऑफर लेटर जारी करना
क्या है आखिरी वाला क्लॉज?
कानून में फर्जी परीक्षाओं का जिक्र इसलिए किया गया है, क्योंकि कई बार बड़ी परीक्षाओं को लेकर ठगी की कोशिश होती है. कई गिरोह इसके लिए फर्जी वेबसाइट्स बना लेते हैं और फर्जी परीक्षा का दावा किया जाता है. कुछ अभ्यर्थी इनके झांसे में फंसकर फीस के नाम पर पैसे देते हैं और ठगे जाते हैं. कानून में मॉक टेस्ट का कोई जिक्र नहीं है और इसे फर्जी परीक्षा नहीं कहा जा सकता है. मॉक टेस्ट छात्रों की प्रैक्टिस के लिए कोचिंग संस्थान करवाते हैं और ये पूरी तरह से लीगल है.
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