भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर बतौर क्रिकेटर भी टीम इंडिया के लिए बेहद सफल रहे हैं. अपने समय के बेहतरीन ओपनर रहे गंभीर के करियर की सबसे यादगार पारियों में टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ खेली 97 रन की मैच-विजयी पारियां हमेशा अहम रहेंगी, वनडे ही नहीं बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी गंभीर ने ऐसी कई पारियां खेली हैं, जो बतौर बल्लेबाज उनकी संपूर्णता का उदाहरण हैं. वनडे विश्व कप 2011 और टी20 विश्व कप 2007 में भारत को चैंपियन बनाने में यादगार भूमिका निभाने वाले गंभीर ने 2018 में संन्यास ले लिया था.
गंभीर बतौर कोच भारतीय क्रिकेट में अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं. गंभीर 9 जुलाई 2024 को भारतीय टीम के कोच बने थे. उनकी कोचिंग में भारतीय टीम आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 जीत चुकी है. उनका बतौर हेड कोच कार्यकाल वनडे विश्व कप 2027 तक है. पहले बतौर क्रिकेटर भारत को विश्व कप दिलाना और फिर बाद में बतौर कोच भारत के लिए टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतना क्रिकेट खेलने वालों के लिए मोटिवेशन से कम नहीं है.
मैंने हमेशा कहा है, एक कप्तान उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी टीम.
एक बातचीत में कोच गंभीर अभिषेक बताते हैं एक कप्तान उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी टीम. यह मेरी लीडरशिप के बारे में नहीं है, यह मेरे बारे में नहीं है. गंभीर हमेशा ऐसे ही रणनीति के साथ अपने करियर में चले हैं. आज भी कोच के तौर पर गंभीर का मकसद टीम के सभी खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना है.
मुझे विरोधी टीम पर हावी होकर गेम खत्म करना पसंद है.
एक खिलाड़ी के तौर पर गंभीर हमेशा से विरोधी गेंदबाजों के खिलाफ क्रीज पर जमकर खेलते थे और विरोधी गेंदबाजों पर लगाम कसने का काम करते थे. उनका यह अंदाज बतौर कोच भी नजर आता है. गंभीर का आक्रामक माइंडसेट दूसरे टीमों के खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी होता है.
लोग यह सोचकर गलती करते हैं कि एक जैसी सोच वाले दो लोग अच्छे से घुलमिल जाते हैं.
गंभीर बताते हैं कि यह गलतफहमी है कि एक जैसी सोच वाले दो लोग अच्छे से घुलमिल जाते हैं, ऐसा नहीं होता है. आपको अपने साथी खिलाड़ियों के साथ सहमत होने की जरूरत नहीं है. आप अपनी बात खुलकर रखने के लिए आजाद होने चाहिए.
मैं मैदान पर बहुत इंटेंस इंसान हूं, मैं हमेशा जीतना चाहता हूं, क्योंकि यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है.
खिलाड़ी के तौर पर भी गंभीर हमेशा हर मैच को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते रहते थे. यही बात अब कोच के तौर पर भी दिखाई देती है. गंभीर हमेशा से एक ऐसे इंसाल रहे हैं जिन्हें हारना पसंद नहीं है.
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