विंडीज के खिलाफ हाल ही खत्म हुई टी20 सीरीज में भारत के पहलू से पॉजिटिव, निगेटिव ज्यादा रहा! और इसमें सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली बात रही बॉलरों का प्रदर्शन. यह सही है कि एशिया उपमहाद्वीप की पिचें ही ऐसी हैं, लेकिन विंडीज बल्लेबाजों के हैदराबाद में बनाए 11.46 रन प्रति ओवर की गति ने भारतीय गेंदबाजी, इसकी रणनीति को लेकर बहुत कुछ कह दिया है. यह सही है कि अब बॉलरों को न्यूजीलैंड में पसंदीदा पिचें और अलग हालात मिलेंगे, लेकिन सीरीज से पहले बचे नाम मात्र के दिनों को देखते हुए इन्हें खुद के लिए इतनी तेजी से ढालना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा. इस विषय से अलग अब यहां से भारतीय बॉलिंग कोच को घरेलू पिचों को लेकर अलग से रणनीति बनानी होगी क्योंकि विंडीज सीरीज ने घरेलू पिचों पर पेस डिमार्टमेंट की पोल खोल दी है. ऊपर से छोटी बाउंड्री और ओस के फैक्टर ने चुनौती को कई गुना बढ़ा दिया है. कुल मिलाकर पेसरों का हालिया प्रदर्शन न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज शुरू होने से पहले फैंस को डरा रहा है.
पेसरों में निरंतरता की कमी
रांची में वेस्टइंडीज द्वारा 250 रनों के विशाल लक्ष्य का नौ गेंद शेष रहते शानदार तरीके से पीछा किए जाने के बाद, भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टीम के प्रदर्शन की कड़ी समीक्षा की. उन्होंने कहा था, 'ये गेंदबाज हमारे गेंदबाज हैं, किसी और के नहीं. इनके करियर दांव पर हैं.' इंदौर को छोड़कर गेंदबाज़ों को वेस्टइंडीज के निडर बल्लेबाज़ी क्रम को रोकने में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. हालांकि, जसप्रीत बुमराह और कुछ हद तक हार्दिक पंड्या की अनुपस्थिति महसूस की गई है, लेकिन टीम प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चिंता अर्शदीप सिंह, मयंक यादव और प्रिंस यादव द्वारा दिखाई गई निरंतरता की कमी है.
ये आंकड़े चिंता पैदा करने वाले
दो युवा तेज़ गेंदबाज़ों, मयंक और प्रिंस, ने इस श्रृंखला के दौरान शानदार प्रदर्शन और खराब गेंदबाज के बीच उतार-चढ़ाव दिखाया है, जो अलग-अलग मैच स्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की चुनौतियों को उजागर करता है. हैदराबाद में खेला गया चौथा टी20 मुकाबला इसका स्पष्ट उदाहरण था. इस मैच में भारत ने 13 वाइड सहित कुल 18 अतिरिक्त रन दिए. इसमें अकेले अर्शदीप ने छह, जबकि मयंक और प्रिंस ने क्रमशः दो और एक रन अतिरिक्त दिए. वाइड यॉर्कर और फुलर डिलीवरी फेंकने के उनके प्रयास बार-बार चूके, जिससे वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को दबाव बनाए रखने का मौका मिला.
विंडीज के खिलाफ सीरीज में भारतीय पेसरों का प्रदर्शन
| नाम | ओवर | रन | विकेट | इकॉमी रन-रेट |
| अर्शदीप सिंह | 16 | 175 | 5 | 10.93 |
| मयंक यादव | 15 | 162 | 4 | 10.80 |
| नितीश कुमार रेड्डी | 5 | 58 | 1 | 11.60 |
अब भुवनेश्वर पर टिकी नजर
नतीजा यह रहा कि भारत में टी20 तेज़ गेंदबाज़ी की गहराई की कमी पर चर्चा शुरू हो गई है. इससे भुवनेश्वर कुमार की वापसी पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है, जिनकी राष्ट्रीय टीम से लगभग चार साल दूर रहने के बाद वापसी समय पर साबित हो सकती है. अनुभवी स्विंग गेंदबाज़ ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने पिछले दो सीज़न में 45 विकेट लिए हैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी सफलता अत्यधिक गति के बजाय नियंत्रण और निष्पादन पर आधारित रही है, जो कि इस श्रृंखला में भारत के युवा तेज़ गेंदबाज़ों में अक्सर नदारद दिखा है. बेंगलुरु में बारिश से प्रभावित सीरीज़ के आखिरी मैच की पूर्व संध्या पर तेज गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने खेल प्रेमियों से आधुनिक क्रिकेटरों पर पड़ने वाली शारीरिक और मानसिक मांगों पर विचार करने का आग्रह किया. मोर्कल ने कहा, 'हम कभी-कभी भूल जाते हैं कि मानसिक थकान एक बड़ी भूमिका निभाती है, हमें इसे प्रबंधित करना होगा और इसके प्रति समझदारी दिखानी होगी. कुछ खिलाड़ी एशियाई खेलों में गए और फिर सीधे वेस्टइंडीज के खिलाफ पूरी श्रृंखला खेलने उतरे. ये खिलाड़ी भी इंसान ही हैं.'
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