यह ख़बर 04 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विकास दर पर पड़ेगी कमजोर मॉनसून की मार...

खास बातें

  • योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि खराब मानसून की वजह से आर्थिक विकास दर मौजूदा साल में घटकर 6 फीसदी होने की आशंका है जो पिछले साल से आधा फीसदी कम है।
नई दिल्ली:

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि खराब मानसून की वजह से आर्थिक विकास दर मौजूदा साल में घटकर 6 फीसदी होने की आशंका है जो पिछले साल से आधा फीसदी कम है।

संयोग से इसी दिन मौसम विभाग ने भी मॉनसून को लेकर इस बात का पुख्ता ऐलान कर दिया कि बारिश औसत से 19 फीसदी कम रही।   

कम बारिश का सीधा मतलब है कई राज्यों में सूखा तय है।

सबसे ज़्यादा फिक्र उत्तर−पश्चिम भारत को लेकर है। अभी तक सौराष्ट्र-कच्छ में 79, दिल्ली−हरियाणा में 71, पश्चिम राजस्थान में 66, पंजाब में 66 कम बारिश हुई है।  

सूखे से निपटने की तैयारी में जुटे कृषि मंत्री शरद पवार और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश सूखा−प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद मगंलवार को अहमदाबाद पहुंचे और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कम बारिश के असर का जायज़ा लिया।

उधर, वर्ल्ड बैंक ने भी चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की उथल-पुथल का असर भी दुनियाभर में खाने−पीने के सामानों पर पड़ेगा।

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अमेरिका में भयानक सूखा पड़ा है। अनाज पैदा करने वाले कई दूसरे देशों में हालात ठीक नहीं हैं और इससे बाज़ार में अनाज की कीमतों में भारी हलचल की उम्मीद है।

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अनिश्चितता के इस माहौल का सबसे बुरा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। कमज़ोर मॉनसून की वजह से कई फसलों की बुआई इस बार पिछले साल के मुकाबले कम हुई है और जब पैदावार कम होगी तो आने वाले दिनों में ज़रूरी चीज़े और महंगी होंगी।