SEBI ChiefOn FPI Outflows: भारतीय शेयर बाजार का आकार और मजबूती लगातार बढ़ रही है, लेकिन विदेशी निवेशक फिर भी यहां निवेश करने से पहले दूसरे बाजारों से तुलना कर रहे हैं. आखिर इसकी वजह क्या है? SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इसकी वजह का खुलासा किया है. उनका कहना है कि भारतीय बाजार दुनिया के बड़े बाजारों के बराबर हैं, लेकिन यहां नियमों के पालन यानी कंप्लायंस का बोझ ज्यादा हो सकता है. इसे कम करने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए सेबी, RBI के साथ मिलकर काम कर रहा है.
विदेशी निवेशक भारतीय शेयर क्यों बेच रहे हैं?
NDTV Profit Ignite 2026 में तुहिन कांत पांडे ने कहा कि विदेशी निवेशक सिर्फ किसी देश की आर्थिक ग्रोथ या कंपनियों की कमाई देखकर निवेश का फैसला नहीं लेते. वे टैक्स, करेंसी में बदलाव, बाजार में शेयर खरीदने-बेचने की आसानी और नियमों के पालन पर होने वाले खर्च को भी देखते हैं. FPI भारतीय बाजार से मिलने वाले रिटर्न को अपनी करेंसी में बदलकर देखते हैं. इसके बाद वे दूसरे देशों के बाजारों से इसकी तुलना करते हैं. जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है, वहां निवेश का फैसला कर सकते हैं.
कंप्लायंस का बोझ कम करने की तैयारी
सेबी चीफ ने कहा कि रेगुलेटर को यह देखना चाहिए कि निवेशकों पर जरूरत से ज्यादा नियमों का बोझ तो नहीं पड़ रहा है. सेबी यह भी जांच करेगा कि भारत में बाजार से जुड़े लोगों और कंपनियों को दूसरे विकसित और उभरते देशों के मुकाबले ज्यादा कंप्लायंस कॉस्ट तो नहीं चुकानी पड़ रही है.
SEBI और RBI मिलकर कर रहे हैं काम
उन्होंने ये भी बताया कि विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री की प्रक्रिया तेज और आसान बनाने के लिए सेबी और RBI साथ काम कर रहे हैं. इसमें निवेशकों के रजिस्ट्रेशन से लेकर लगातार नियमों का पालन करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर विचार किया जा रहा है. इसके अलावा, सेबी डिस्क्लोजर से जुड़े नियमों और निवेश की सीमा तय करने वाले कुछ नियमों की भी समीक्षा कर रहा है, जो विदेशी निवेशकों के लिए रुकावट बन सकते हैं. इन बदलावों पर सुझाव लेने के लिए सेबी जल्द कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा. इसमें निवेशकों और बाजार से जुड़े दूसरे लोगों की राय ली जाएगी.
क्या इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकेगी?
SEBI चीफ ने साफ किया कि नियम आसान करने से विदेशी निवेशकों की बिकवाली तुरंत रुक जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा. विदेशी निवेशक भारत में निवेश का फैसला देश की आर्थिक स्थिति, बाजार को लेकर भरोसे, लिक्विडिटी और बाजार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी निर्भर करता है.यानी भारतीय बाजार में निवेश की प्रक्रिया आसान करना सेबी की प्राथमिकताओं में है, लेकिन विदेशी निवेशकों की वापसी कई दूसरे फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगी.
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