भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों और कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी है. बाजार नियामक सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने NDTV Profit Ignite 2026 में कहा कि SEBI मेनबोर्ड IPO और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के नियमों की समीक्षा कर रहा है. इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन में लगने वाला समय घटाकर पांच कारोबारी दिन तक लाने का लक्ष्य है.
पांडे ने कहा कि SEBI ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रहा है, जिसमें थर्ड-पार्टी एजेंसियां जांचेंगी कि IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी ने बताए गए उद्देश्य के मुताबिक किया है या नहीं. उन्होंने बिना आर्थिक गतिविधियों वाली कुछ लिस्टेड कंपनियों को बाजार के लिए जोखिम बताते हुए ऐसी कंपनियों को हटाने की बात भी कही.
शेयर बाजार की असली परीक्षा
SEBI चेयरमैन ने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार की असली परीक्षा ये है कि वो देश की इकोनॉमी को कितन प्रभावी तरीके से पूंजी उपलब्ध कराते हैं. बाजार का काम सिर्फ शेयरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि बचत करने वालों की पूंजी को उन कारोबारों तक पहुंचाना भी है, जिन्हें विकास के लिए पैसे की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार अब देश के पूंजी बाजार के लिए फंड का अहम स्रोत बनते जा रहे हैं. बैंक अब भी जरूरी हैं, लेकिन कंपनियों को इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और दूसरे निवेश माध्यमों से भी पूंजी मिलती है.
पांडे के मुताबिक, वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) ऐसे कारोबारों को पूंजी देते हैं, जिन्हें लंबे समय के निवेश की जरूरत होती है. वहीं, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) के जरिए रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगी पूंजी को अनलॉक करने में मदद मिलती है.
“We have to stop malpractices with a heavy hand. It's a fake world!” At NDTV Profit Ignite: Diwali Edition, SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey spoke about those spreading misleading stock tips on WhatsApp & Telegram. #NDTVProfitIgnite https://t.co/Qhacv1SULO
— NDTV Profit News (@NDTVProfit) October 28, 2026
शेयर बाजार में 15 करोड़ से ज्यादा निवेशक
पांडे ने भारतीय पूंजी बाजार के आकार का जिक्र करते हुए बताया कि देश में इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 470 लाख करोड़ रुपये है. बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड का आकार करीब 61 लाख करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 83 लाख करोड़ रुपये है.
उन्होंने कहा कि भारतीय सिक्योरिटी मार्केट में अब 15 करोड़ से ज्यादा यूनिक निवेशक हैं. ये आंकड़ा बाजार में बढ़ती भागीदारी को दिखाता है. हालांकि, निवेशकों की संख्या बढ़ने के साथ ये सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि लोग जोखिम और निवेश से जुड़े नियमों को समझकर फैसला लें.
63% परिवारों को जानकारी, सिर्फ 9.5% की भागीदारी
SEBI के निवेशक सर्वे का हवाला देते हुए पांडे ने कहा कि करीब 63% परिवारों को बाजार के कम से कम एक उत्पाद की जानकारी है. लेकिन बाजार में वास्तव में भागीदारी करने वाले परिवारों का हिस्सा केवल करीब 9.5% है.
पांडे ने कहा कि निवेश सोच-समझकर किया गया फैसला होना चाहिए. उनके मुताबिक, बाजार तक आसान पहुंच का मतलब ये नहीं है कि निवेशक को सभी उत्पादों और उनसे जुड़े जोखिमों की पूरी समझ भी है.
विदेशी निवेशकों की एंट्री 5 दिन में कराने का लक्ष्य
SEBI विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान बनाने पर काम कर रहा है. पांडे के मुताबिक, नियामक का लक्ष्य FPI ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय महीनों से घटाकर पांच कारोबारी दिन तक लाना है.
इस कदम से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है. हालांकि, पांच कारोबारी दिन का समय SEBI का लक्ष्य है. इसे सभी मामलों में लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए.
मेनबोर्ड IPO और FPO के नियमों की समीक्षा
पांडे ने बताया कि SEBI मेनबोर्ड IPO और FPO से जुड़े मौजूदा फ्रेमवर्क की समीक्षा कर रहा है. इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए बाजार से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को तेज करना और लागत कम करना है.
नियामक की कोशिश है कि ऑफर डॉक्यूमेंट खुदरा निवेशकों के लिए आसानी से उपलब्ध हों और निवेशक IPO में पैसा लगाने से पहले जरूरी जानकारी समझ सकें.
SEBI IPO से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल की निगरानी के लिए थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग एजेंसियों का सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रहा है. ऐसी एजेंसियां जांच सकती हैं कि कंपनी ने IPO के दौरान बताए गए उद्देश्य के लिए ही रकम खर्च की है या नहीं.
म्यूचुअल फंड सेटलमेंट और REIT-InvIT की लिस्टिंग पर भी काम
SEBI म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन में नेट सेटलमेंट की संभावना की जांच कर रहा है. इसके अलावा, REIT और InvIT की लिस्टिंग की समयसीमा को इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग की समयसीमा के अनुरूप बनाने पर भी विचार किया जा रहा है.
इन प्रस्तावों का उद्देश्य बाजार की प्रक्रियाओं को ज्यादा व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है. हालांकि, इन बदलावों के लागू होने की तारीख और अंतिम नियमों को लेकर अभी औपचारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा.
कैश मार्केट के लिए CAS पर एक साल तक जारी रहेगी व्यवस्था
पांडे ने CAS से जुड़े प्रावधानों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि कैश मार्केट के लिए मौजूदा CAS व्यवस्था एक साल तक जारी रहेगी, जबकि एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस से इसे अलग रखा गया है. एक साल बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी.
CAS का पूरा संदर्भ और इसके तकनीकी प्रावधान समझने के लिए संबंधित SEBI सर्कुलर देखना जरूरी होगा.
शेल कंपनियों पर सख्ती करेगा SEBI
SEBI चेयरमैन ने कहा कि कुछ लिस्टेड कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी कोई वास्तविक आर्थिक गतिविधि नहीं है. ऐसी कंपनियां बाजार में जोखिम बढ़ाती हैं और नियामक इन्हें हटाने की दिशा में काम करेगा.
पांडे ने कहा कि बाजार में निष्पक्षता और मजबूती बनाए रखना नियमन का अहम उद्देश्य है. उनके मुताबिक, अच्छे नियमन से तीन नतीजे मिलने चाहिए. कंपनियों को पूंजी तक प्रभावी पहुंच, निवेशकों की सुरक्षा और निष्पक्ष व मजबूत बाजार.
SEBI कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान बनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर निवेशकों की सुरक्षा, पारदर्शिता और बाजार में भरोसा बनाए रखने पर भी जोर दे रहा है.
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