दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल का कहना है कि शेयर बाजार में निवेश करते समय कंपनियों के मार्केट कैप से ज्यादा उनकी कमाई, ग्रोथ की संभावना और शेयर की कीमत पर ध्यान देना चाहिए. NDTV Profit Ignite 2026 कार्यक्रम में उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि बाजार की सुर्खियों से प्रभावित होने के बजाय कंपनियों की बैलेंस शीट और अर्निंग्स पर फोकस करें.
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने निवेशकों को एक सीधी सलाह दी है. उनका कहना है कि निवेश के लिए अच्छी कंपनियां चुनते समय सबसे ज्यादा ध्यान उनकी कमाई और भविष्य में कमाई बढ़ाने की क्षमता पर देना चाहिए.
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल ने बुधवार को NDTV Profit के मंच पर कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था और कंपनियों के कारोबार में तेजी बनी हुई है. उनके मुताबिक, निवेशकों को खबरों के शोर में उलझने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल्स पर ध्यान देना चाहिए.
'कमाई, कमाई और कमाई', यही है निवेश का मंत्र
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि निवेशकों को खबरों के आधार पर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए. उनके मुताबिक, कंपनियों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए उनकी बैलेंस शीट और कमाई को देखना ज्यादा जरूरी है.
उन्होंने कहा, 'ये कमाई, कमाई और कमाई का मामला है. खबरें देखना बंद कीजिए और बैलेंस शीट तथा कमाई पर ध्यान दीजिए.'
“High growth, low PE.” At NDTV Profit Ignite Diwali Edition, Raamdeo Agrawal, Chairman & Co-Founder of Motilal Oswal Financial Services, tells @Niraj_Shah that he looks beyond market caps, focusing on reasonable valuations across large and small-cap stocks. #NDTVProfitIgnite https://t.co/WeEfou2n4J
— NDTV Profit News (@NDTVProfit) October 28, 2026
AI, डिफेंस और एनर्जी ट्रांजिशन में निवेश से बढ़ रहा कारोबार
वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति पर बात करते हुए अग्रवाल ने कहा कि दुनिया भर में कई ऐसे सेक्टर हैं, जहां बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिफेंस और एनर्जी ट्रांजिशन में हो रहे खर्च को इसकी प्रमुख वजह बताया.
उन्होंने कहा, 'दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी के दौर में है. AI कैपेक्स, डिफेंस कैपेक्स और एनर्जी ट्रांजिशन कैपेक्स की वजह से हर तरफ तेजी है.'
कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च. इसका मतलब कारोबार बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने या बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए किया जाने वाला निवेश है.
अग्रवाल के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और दूसरी आर्थिक चुनौतियों से जुड़ी खबरें भले ही अनिश्चितता का माहौल बनाती हों, लेकिन निवेशकों को ये भी देखना चाहिए कि कंपनियों के कारोबार और मुनाफे पर उनका वास्तविक असर क्या पड़ रहा है.
बड़ी कंपनी हो या छोटी, मार्केट कैप नहीं है पहली शर्त
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि शेयर चुनते समय वो कंपनी के मार्केट कैप यानी बाजार पूंजीकरण को सबसे बड़ी कसौटी नहीं मानते. उनके लिए ज्यादा अहम बात ये है कि कंपनी कितनी तेजी से आगे बढ़ सकती है और उसका शेयर किस कीमत पर मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि वो 10 मिलियन डॉलर, 100 मिलियन डॉलर या एक बिलियन डॉलर की कंपनी में भी निवेश कर सकते हैं. यानी कंपनी छोटी है, मझोली है या बड़ी, ये अपने आप में निवेश का फैसला करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है.
उनके मुताबिक, किसी कंपनी का आकार देखकर उसे निवेश के योग्य या अयोग्य मानने के बजाय उसकी ग्रोथ की संभावना और वैल्यूएशन को समझना चाहिए.
कम वैल्यूएशन पर तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों की तलाश
अग्रवाल की निवेश रणनीति में दो बातें खास हैं- कंपनी की कमाई बढ़ने की अच्छी संभावना और शेयर का उचित या आकर्षक वैल्यूएशन.
उन्होंने कहा कि बाजार में ऐसी कंपनियों के मौके मिल रहे हैं, जिनके शेयर 15 से 20 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) मल्टीपल पर कारोबार कर रहे हैं. कुछ मामलों में ये वैल्यूएशन इससे भी कम हो सकता है.
PE रेशियो से पता चलता है कि निवेशक कंपनी की एक रुपये की सालाना कमाई के लिए शेयर की कीमत के रूप में कितने रुपये देने को तैयार हैं. उदाहरण के लिए, 20 का PE रेशियो होने का मतलब है कि शेयर की कीमत कंपनी की प्रति शेयर सालाना कमाई की 20 गुना है.
हालांकि, सिर्फ कम PE रेशियो देखकर किसी शेयर को सस्ता नहीं मान लेना चाहिए. कंपनी की ग्रोथ, कर्ज, कारोबार की गुणवत्ता और भविष्य की कमाई की संभावना को भी समझना जरूरी है.
गिरते बाजार में निवेश के लिए चाहिए भरोसा और धैर्य
बाजार में गिरावट के दौरान निवेश कैसे किया जाए, इस सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि ऐसे समय में खरीदारी करने के लिए अपने फैसले पर भरोसा होना जरूरी है.
उनकी बात का सार ये है कि निवेशक को सिर्फ बाजार में गिरावट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. उसे ये समझना होगा कि जिस कंपनी में वो निवेश कर रहा है, उसके कारोबार की बुनियाद मजबूत है या नहीं और उसकी कमाई आगे बढ़ सकती है या नहीं.
लॉन्ग टर्म में एसेट बनाने के लिए ऐसी कंपनियों की पहचान करना अहम है, जो लगातार अपनी कमाई बढ़ा सकें. लेकिन इसके लिए धैर्य के साथ सही वैल्यूएशन पर निवेश करने की जरूरत होती है.
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