EPS-95 Higher Pension: प्राइवेट सेक्टर के लाखों कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने क ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सिर्फ कंपनी के PF ट्रस्ट के नियमों का हवाला देकर योग्य कर्मचारियों की हायर पेंशन एप्लीकेशन खारिज नहीं कर सकता. कोर्ट ने EPFO को 40 से ज्यादा कर्मचारियों के जॉइंट ऑप्शन एप्लीकेशन को 8 हफ्ते के भीतर प्रोसेस कर मंजूर करने का निर्देश दिया है.
इस फैसले से उन हजारों प्राइवेट कर्मचारियों का रास्ता साफ हो गया है, जिनके दावे सिर्फ इसलिए रोक दिए गए थे कि उनकी कंपनी के ट्रस्ट रूल्स में ज्यादा पेंशन का अलग से प्रावधान नहीं था.
8 हफ्ते में हायर पेंशन देने का निर्देश
यह फैसला 19 अक्टूबर को जस्टिस संदीप वी. मरने ने सुनाया. इस मामले में Abbott India, Tata Communications, Raymond Steel और BEST Undertaking जैसी कंपनियों के 40 से ज्यादा कर्मचारियों की याचिकाएं शामिल थीं. कर्मचारियों ने EPFO के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उनकी हायर पेंशन की एप्लीकेशन खारिज कर दी गई थी. कोर्ट ने इन आदेशों को रद्द करते हुए संबंधित कर्मचारियों के जॉइंट ऑप्शन को 8 हफ्ते में प्रोसेस कर मंजूर करने का निर्देश दिया.
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EPFO ने ट्रस्ट रूल्स का बहाना बनाकर हायर पेंशन एप्लीकेशन किया खारिज
कुछ कंपनियां छूट मिलने के बाद अपना PF ट्रस्ट चलाती हैं. इन ट्रस्ट के नियमों में योगदान को तय सैलरी लिमिट तक सीमित रखा गया था या ज्यादा पेंशन के लिए जॉइंट ऑप्शन देने का साफ प्रावधान नहीं था.EPFO ने इन्हीं नियमों का हवाला देकर कर्मचारियों के आवेदन खारिज किए थे. कुछ मामलों में पुराने दस्तावेजों की कमी और सैलरी के अलग-अलग हिस्सों पर योगदान को लेकर भी सवाल उठे थे.कर्मचारियों का कहना था कि कंपनी के PF ट्रस्ट के नियम EPS-95 के तहत मिलने वाले हायर पेंशन के ऑप्शन को खत्म नहीं कर सकते.
क्या PF ट्रस्ट के नियम रोक सकते हैं आपकी हायर पेंशन?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के EPFO बनाम सुनील कुमार बी. फैसले पर भी विचार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के EPS संशोधनों को बरकरार रखा था. तय शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारी ज्यादा सैलरी पर PF कॉन्ट्रीब्यूशन के आधार पर हायर पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं.कोर्ट ने यह भी कहा कि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर दूसरे तरीकों से जांच की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को अपनी बात रखने का मौका भी दिया जाना चाहिए. हालांकि, इस फैसले से सभी EPFO मंबर्स को अपने आप हायर पेंशन नहीं मिलेगी. इसके लिए EPS-95 की एलिजिबिलिटी और कॉन्ट्रीब्यूशन से जुड़ी शर्तें पूरी करना जरूरी है.
EPF vs EPS: सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुआ
आपको PF और EPS में अंतर समझना भी जरूरी है. कर्मचारी और नियोक्ता दोनों EPF में कॉन्ट्रीब्यूशन करते हैं, लेकिन नियोक्ता के कॉन्ट्रीब्यूशन का एक हिस्सा नियमों के अनुसार EPS में जाता है.EPS की सैलरी लिमिट 2014 में बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह की गई थी. 17 सितंबर से इसे ₹25,000 करने की बात कही गई है. जिन कर्मचारियों ने तय सीमा से ज्यादा सैलरी पर PF में कॉन्ट्रीब्यूशन किया है, वे पात्रता पूरी होने पर हायर पेंशन के लिए जॉइंट ऑप्शन दे सकते हैं.
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