क्रेडिट कार्ड के बढ़ते चलन का भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े से पता चलता है. RBI के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में लगातार तीसरे महीने देश में Credit Card से 2 ट्रिलियन यानी 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं. साल 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच क्रेडिट कार्ड से औसत खर्च 1.93 ट्रिलियन था जो साल 2026 में 2 ट्रिलियन पहुंच गया है. यह भी बताया गया है कि कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट कार्ड की संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 122.86 मिलियन हो गई, जो जून में 121.6 मिलियन थी. जबकि जुलाई 2025 में 111.62 मिलियन थी.
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंकों में कार्ड की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, वहीं विदेशी बैंकों में इस दौरान आउटस्टैंडिंग कार्ड की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है.
2 लाख करोड़ का खर्च अब आम बात
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड से 2 लाख करोड़ का खर्च अब आम बात हो सकती है. आने वाले कुछ महीनों में देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और खर्च का यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है. अगर खर्च करने का यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो यह 'नया नॉर्मल' बन सकता है. विदेशी बैंक अपना मार्केट शेयर खो रहे हैं. भले ही प्राइवेट सेक्टर के बैंक क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में सबसे पहले आए थे, लेकिन पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने अपनी रफ्तार बढ़ाई है और धीरे-धीरे मार्केट शेयर हासिल किया है.
बिजनेस स्टैडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2026 की जनवरी से जुलाई महीने में इंडस्ट्री में विदेशी बैंकों के आउटस्टैंडिंग क्रेडिट कार्ड की संख्या में कमी आई, लेकिन कार्ड से खर्च बढ़ता रहा. जुलाई में विदेशी बैंकों के आउटस्टैंडिंग क्रेडिट कार्ड 0.12 मिलियन घटकर 4.24 मिलियन रह गए. हालांकि, उस महीने में क्रेडिट कार्ड से खर्च बढ़कर 0.09 ट्रिलियन रुपये हो गया.
तीन महीने में 39 लाख नए कार्ड जारी
इस बीच, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने जनवरी-जुलाई के दौरान 39 लाख नए कार्ड जारी किए, जिससे उनकी कुल संख्या 8.691 करोड़ हो गई, जबकि पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने 15.5 लाख नए कार्ड जारी किए, जिससे उनकी कुल संख्या 2.94 करोड़ हो गई.
खर्च की बात करें तो प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने 1.50 लाख करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया गया. इसमें देश के सबसे बड़े क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक, HDFC बैंक ने खर्च में सालाना 11.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 60,217.54 करोड़ रुपये हो गया. इसके उलट, ICICI बैंक के कार्ड खर्च में सालाना 5.9 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 34,025.27 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक्सिस बैंक ने 4.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी के साथ 23,824.7 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया.
दूसरी ओर, सरकारी बैंकों का खर्च 0.46 ट्रिलियन रुपये रहा, जिसमें सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक कार्ड जारी करने वाले SBI कार्ड ने साल-दर-साल 21.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 39,591.76 रुपये करोड़ का आंकड़ा दर्ज किया.
प्रमुख कार्ड जारी करने वाले बैंकों में, HDFC बैंक ने महीने के दौरान 230,067 कार्ड जोड़े, जिससे उसका कुल कार्ड बेस 26.97 मिलियन हो गया. SBI कार्ड ने 183,076 कार्ड जोड़कर 22.76 मिलियन का आंकड़ा छुआ, जबकि ICICI बैंक ने 170,156 कार्ड जोड़कर अपना बेस 19.69 मिलियन तक पहुंचाया. एक्सिस बैंक ने 70,091 कार्ड जोड़े, जिससे उसका कुल कार्ड बेस 16.26 मिलियन हो गया.
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