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टॉक्सिक की डायरेक्टर स्कूल में बार बार होती थी फेल, पिता के एक सवाल ने करवाया सच का सामना, बनी सफल फिल्ममेकर

टॉक्सिक की निर्देशक गीतू मोहनदास ने अपनी बचपन की एक ऐसी याद का खुलासा किया है जिसे सुनकर उनके फैंस काफी शॉक्ड है. उन्होंने बताया कि कम नंबर आने की वजह से किस तरह से स्कूल के टीजरों ने उन्हें नजरअंदाज करते थे.

टॉक्सिक की डायरेक्टर स्कूल में बार बार होती थी फेल, पिता के एक सवाल ने करवाया सच का सामना, बनी सफल फिल्ममेकर
Geethu Mohandas Success Story
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 Geetu Mohandas Success Story: यश स्टारर फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' की  आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, जिसे लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. यश के फैंस फिल्म देखने के लिए सुबह से थिएटर के बाहर लाइनों में लगकर फिल्म देखने का इंतजार कर रहे है. फिल्म के क्रेज का आलम इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि इसकी टिकट ओपनिंग शानदार रही है.

फिल्म को दर्शकों तक लाने के लिए इसकी निर्देशक गीतू मोहनदास और मूवी के स्टार कास्ट ने काफी मेहनत की जिसकी चर्चा मूवी के लॉन्च इवेंट में होती रही है. इन्ही इवेंट में से पिछले दिनों मूवी की निर्देशक ने एक ऐसा इमोशनल किस्सा शेयर किया वहां मौजूद लोग सुनकर शॉक्ड हो गए कि  एक सवाल ने कि 500 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ रुपये के बीच की बजट फिल्म टॉक्सिक की डायरेक्टर के साथ बी ऐशा कुछ हो सकता है, वह भी फेलियर बन सकती है,

पढ़ाई में थी कमजोर , तो टीचर करते थे नजरअंदाज

दरअसल बीते दिनों चेन्नई में आयोजित 'टॉक्सिक के खास कार्यक्रम में गीतू ने बताया कि आज भले ही वह एक सफल फिल्ममेकर के तौर पर पहचानी जाती हों, लेकिन बचपन में उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था, उन्होंने खुलासा किया कि वह पढ़ाई में कमजोर थीं और स्कूल में कई बार असफल भी हुईं. इसी कारण  उन्हें खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता था.

गीतू ने बताा कि मैं पढ़ाई में अच्छी नहीं थी और अक्सर फेल हो जाती थी. स्कूल की कई गतिविधियों में भी मुझे चुना नहीं जाता था. इसके कारण धीरे-धीरे मुझे लगने लगा था कि शायद मैं जिंदगी में कुछ नहीं कर पाऊंगी. हालांकि, जब वह निराश और हताश रहने लगी तो उनके पिता ने उन्हें बेहद हिम्मत बंधाई. उनके एख सवाल ने गीतू को अपनी रहात चुनने में आसानी दिला दी.

पिता के सवाल से बन गई टॉक्सिक निर्देशक की जिंदगी

 उनके पिता ने उनसे एक ऐसा सवाल पूछा कि वह जिंदगी में आखिर क्या बनना चाहती हैं. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि वह एक बेकर बनना चाहती हैं. गीतू के मुताबिक, उनके पिता ने उस समय उन्हें कोई लंबा भाषण नहीं दिया, बल्कि सिर्फ इतना कहा, "अगर तुम बेकर बनना चाहती हो, तो अपने शहर की सबसे अच्छी बेकर बनने की कोशिश करो."

सफलता से पहले खुद पर भरोसा करना

पिता का यह आम सा सवाल गीतू के दिल में हमेशा के लिए ऐसा बसा कि वह उस सपने को जीने लगी.  जिसके बाद उन्होंने उसी दिन से तय कर लिया था कि जो भी करेंगी, पूरी मेहनत और लगन के साथ करेंगी. उन्होंने अपनी तुलना उस घोड़े से की, जिसकी नजर सिर्फ अपने लक्ष्य पर होती है और जो रास्ते की आवाजों या आलोचनाओं से कभी घबराता नहीं है. पिता की उस सीख ने मुझे सिखाया कि सफलता से पहले खुद पर भरोसा करना सबसे जरूरी होता है."

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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