1950 में आई फिल्म ‘आरजू' का गाना ‘ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई न हो' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दभरे गीतों में शामिल है. तलत महमूद की मखमली और हल्की कंपन वाली आवाज ने इस गाने में तन्हाई और टूटे दिल की कसक को बेहद खूबसूरती से उतारा. पर्दे पर इसे दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था. संगीत अनिल विश्वास का था और बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. खास बात यह है कि यही गीत तलत महमूद के शुरुआती हिंदी फिल्मी सफर की बड़ी कामयाबी बना और आगे चलकर उनकी खास पहचान बनी.
तलत की आवाज में था दर्द, अनिल विश्वास ने पहचानी खासियत
तलत महमूद की आवाज में मौजूद हल्की-सी कंपकंपी उनकी सबसे अलग पहचान थी. अनिल विश्वास ने इसी खूबी को पहचानकर उन्हें आरजू में मौका दिया. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में इस कंपन को छिपाने की कोशिश की गई थी, लेकिन अनिल विश्वास ने इसे ही तलत की आवाज की खूबसूरती माना. ‘ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' में यही अंदाज सुनाई देता है.
दिलीप कुमार-कामिनी कौशल की कहानी से जुड़ा था गीत
आरजू में दिलीप कुमार और कामिनी कौशल मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म में दिलीप कुमार ने बादल और कामिनी कौशल ने कामिनी ‘कम्मू' का किरदार निभाया था. फिल्म का निर्देशन शाहिद लतीफ ने किया था, जबकि निर्माता हितेन चौधरी थे. कहानी को एमिली ब्रोंटे के मशहूर उपन्यास Wuthering Heights से इंस्पायर्ड बताया जाता है. फिल्म के संगीत में तलत महमूद के इस गीत के अलावा लता मंगेशकर और दूसरे गायकों के भी कई यादगार गीत शामिल थे.
बॉक्स ऑफिस पर भी चली थी ‘आरजू'
पुराने बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार आरजू ने करीब 45 लाख रुपये नेट और 80 लाख रुपये ग्रॉस कमाए थे और 1950 की फिल्मों में नौवें स्थान पर रही थी. इसे सेमी हिट का दर्जा दिया गया है. हालांकि आज फिल्म की सबसे बड़ी पहचान उसके बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से ज्यादा उसके संगीत से जुड़ी है.
‘ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' की लोकप्रियता ने तलत महमूद को हिंदी फिल्मों में मजबूत पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने दिलीप कुमार के लिए बाबुल, दाग, तराना, फुटपाथ जैसी फिल्मों में भी अपनी आवाज दी. इसीलिए यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि तलत महमूद और दिलीप कुमार की यादगार संगीत यात्रा का अहम पड़ाव भी माना जाता है.
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