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जब माधुरी दीक्षित से नाना पाटेकर कर बैठे थे जुनूनी मोहब्बत, सुनाई थी ऐसी शायरी, 28 साल बाद भी है दिलजले आशिकों की फेवरेट

1998 की इस फिल्म में नाना पाटेकर ने प्रेम को एक अलग ही अंदाज में पर्दे पर उतारा. उनकी आवाज, ठहराव और जुनूनी अदायगी ने कविता को सिर्फ रोमांटिक नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें बेचैनी और पागलपन भी भर दिया.

जब माधुरी दीक्षित से नाना पाटेकर कर बैठे थे जुनूनी मोहब्बत, सुनाई थी ऐसी शायरी, 28 साल बाद भी है दिलजले आशिकों की फेवरेट
जब माधुरी दीक्षित से नाना पाटेकर कर बैठे थे जुनूनी मोहब्बत
नई दिल्ली:

कुछ किरदार पर्दे पर आते हैं और अपनी कहानी से ज्यादा अपनी आवाज और अंदाज के लिए याद रह जाते हैं. उनकी कही कुछ लाइन्स ऐसी होती हैं, जिन्हें सालों बाद भी लोग दोहराते हैं. खासकर तब, जब प्यार में मासूमियत के साथ बेचैनी, जुनून और दर्द भी शामिल हो. ऐसी ही एक अदायगी ने 90 के दशक के दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा था. इसे सुनते हुए कभी प्रेम महसूस होता है, तो अगले ही पल किरदार की बेचैनी डराने लगती है. यही कॉन्फ्लिक्ट इस पेशकश को इतना खास बनाता है और इसे नॉर्मल रोमांटिक पोयम से अलग करता है.

नाना पाटेकर की शायरी का असर

1998 की फिल्म ‘वजूद' में नाना पाटेकर ने मल्हार का किरदार निभाया था. फिल्म में उनका किरदार थिएटर से जुड़ा एक बेहद जुनूनी और इमोशनल इंसान है. जो माधुरी दीक्षित के किरदार सोफिया से ओब्सेस्ड है. इसी कहानी में एक ऐसा मंचन आता है. जहां नाना पाटेकर की आवाज में कही गई शायरी धीरे-धीरे प्रेम से जुनून और फिर बेचैनी का रूप ले लेती है.

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‘कैसे बताऊं मैं' के नाम से पहचानी जाने वाली ये पेशकश दरअसल एक सामान्य फिल्मी गाने की तरह नहीं, बल्कि कविता और संवाद के बीच की लगती है. इसलिए इसका असर सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि नाना की अदायगी से भी और ज्यादा बढ़ जाता है. इसकी सबसे खास बात इसका अंदाज है. नाना पाटेकर इसे किसी रोमांटिक हीरो की तरह नहीं बोलते. उनकी आवाज कभी धीमी पड़ती है, कभी ठहरती है और फिर अचानक तीखी हो जाती है.

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जावेद अख्तर ने लिखे बोल

इसके पीछे लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के शब्द थे, जबकि फिल्म का निर्देशन एन. चंद्रा ने किया था. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे पारंपरिक रोमांटिक शायरी की तरह पेश करने के बजाय नाना पाटेकर की शख्सियत और बात करने के तरीके के मुताबिक रखा गया.

यही कॉन्ट्रास्ट इसका सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट बना. आमतौर पर रोमांटिक पोएट्री को सॉफ्ट और खूबसूरत अंदाज में पेश किया जाता है, लेकिन यहां वही इमोशन्स एक बेचैन और जुनूनी किरदार की आवाज से निकलते हैं. जावेद अख्तर की पोयम में तय गाने जैसी लय के बजाय संवाद का फ्लो दिया गया. ये भी कहा जाता है कि खुद नाना पाटेकर ने सेट पर ही इसे इंप्रोवाइज भी किया.

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