फिल्म निर्देशक अनंत महादेवन की आने वाली फिल्म ‘कन्फेशन ऑफ मैरी' अपनी कहानी को लेकर चर्चा में है. फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है जो 1966 में केरल में हुई थी. फिल्म में नाना पाटेकर एक पादरी की भूमिका निभा रहे हैं. जिस घटना पर फिल्म आधारित है, उस समय भी इसे लेकर काफी विवाद हुआ था. अब फिल्म के जरिए इस घटना को पर्दे पर दिखाए जाने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. इस पूरे विवाद पर फिल्म के निर्देशक अनंत महादेवन और निर्माता सुभाष काले ने एनडीटीवी से खास बातचीत की.
फिल्म के विवाद को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत महादेवन ने कहा कि जब यह घटना हुई थी, तब भी पादरी के खिलाफ और उनके समर्थन में लोग खड़े हुए थे. अनंत महादेवन ने कहा, “जिस वक्त यह घटना घटी थी, 1966 में केरल में, उस वक्त भी बहुत सारे लोग पादरी के खिलाफ खड़े हो गए थे और बहुत सारे लोग पादरी को सपोर्ट करते हुए भी खड़े हो गए थे. अपोजिशन तो हमेशा होता ही रहेगा, फॉर और अगेंस्ट.” उन्होंने आगे कहा कि जब लोगों को पूरी सच्चाई का पता चला, तब उनकी धारणा बदली. निर्देशक के मुताबिक, “लेकिन जब सच्चाई पता चली सबको, तब जाकर उनको लगा कि यह गॉड मैन नहीं था, यह मैन ऑफ गॉड था और यही जो नोबल फैक्टर है, फिल्म में जो नोबिलिटी है, यही नाना पाटेकर साहब को भी बहुत भाया.”
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अनंत महादेवन ने बताया कि जब उन्होंने नाना पाटेकर को फिल्म की कहानी सुनाई तो उन्हें यह बात खास तौर पर प्रभावित कर गई कि यह भारत का पहला ऐसा मामला था, जिसमें एक पादरी को फांसी की सजा सुनाई गई थी. उन्होंने कहा, “मैंने जब नाना पाटेकर साहब को सुनाया कि यह पहला फादर है, जिनको इंडिया में फांसी की सजा सुनाई गई थी और क्या वह सच था? उसके पीछे क्या सच्चाई थी? जब वह सच्चाई पता चलती है तो ऐसा झंझोड़कर रख देती है.”
निर्देशक के मुताबिक फिल्म को सिर्फ एक मिस्ट्री या थ्रिलर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. वह कहते हैं कि कहानी का खुलासा इससे कहीं ज्यादा गहरा है. “हम इसको सोशल सस्पेंस, मिस्ट्री, थ्रिलर सब कहते हैं, लेकिन उसका जो खुलासा है, जब हमें पता चलता है कि वह मिस्ट्री से बहुत ज्यादा डीप है और उसके अंदर बहुत कुछ है, जो हम सबके कॉन्शियंस, हमारे कमिटमेंट और हमारे सोशल गिल्ट को एक तरह से झंझोड़कर रख देता है.”
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अनंत महादेवन का कहना है कि फिल्म की कहानी रहस्य से आगे जाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म को लेकर सवाल उठाने वालों से उन्होंने अपील की कि वे फिल्म देखे बिना कोई धारणा न बनाएं. उन्होंने कहा, “यह मिस्ट्री से भी बहुत ज्यादा और बहुत आगे जाती है. मैं तो उन लोगों से यही कहूंगा कि जिन-जिन लोगों को कोई शक है कि इस तरह की फिल्म होनी चाहिए या इस तरह की फिल्म नहीं होनी चाहिए, वह तब तक रुकें जब तक फिल्म रिलीज न हो और खुद जाकर फिल्म देखें. फिल्म में जो डिस्क्लोजर है, उसे देखने के बाद उनके सारे डाउट्स दूर हो जाएंगे.”
‘कन्फेशन ऑफ मैरी' के जरिए अनंत महादेवन छह दशक पुरानी उस घटना को नए नजरिए से दर्शकों के सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं. फिल्म में नाना पाटेकर का पादरी का किरदार कहानी का अहम हिस्सा है और अब रिलीज से पहले उठ रहे विवाद के बीच फिल्म की कहानी और उसका खुलासा दर्शकों के बीच उत्सुकता का विषय बन गया है.
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