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लता मंगेशकर के करियर का वो सॉन्ग जिसे गाने में छूट गए थे सुर कोकिला के पसीने, डायरेक्टर ने किया था रिजेक्ट, 62 साल बाद भी इसका जादू कायम

लता मंगेशकर ने अपने करियर में कई गाने गाए लेकिन उन्होंने एक ऐसा गीत गाया जो उनके लिए गाना बेहद मुश्किल था. लेकिन ये गाना ऐसा हिट हुआ कि 62 साल बाद भी इस गाने का जादू बरकरार है. खास बात ये है कि इस अमरगीत को डायरेक्टर ने पहली बार सुनकर रिजेक्ट कर दिया था.

लता मंगेशकर के करियर का वो सॉन्ग जिसे गाने में छूट गए थे सुर कोकिला के पसीने, डायरेक्टर ने किया था रिजेक्ट, 62 साल बाद भी इसका जादू कायम
लग जा गले गाना नहीं था आसान, लता मंगेशकर ने भी माना था मुश्किल
नई दिल्ली:

बॉलीवुड के इतिहास में कुछ गाने ऐसे हैं जो अपने बोल और संगीत के साथ उसके पीछे छिपी कहानियों के लिए भी जाने जाते हैं. आज हम लता मंगेशकर के एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जो उन्होंने अपनी सुरीली आवाज से अमर बना दिया. 58 साल पुराना ये गाना आज भी हर किसी को पसंद आता है. चाहे फिर आप प्यार में हो या फिर ना हो, लेकिन इस गाने को सुनते ही मन में एक अलग सी टीस उठती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुपरहिट गाने को डायरेक्टर ने पहली बार सुनकर रिजेक्ट कर दिया था. इसके साथ ही लता जी ने भी इस गाने को गाना आसान नहीं बताया था. इस गाने में मुश्किल सिर्फ इसके सुर नहीं थे बल्कि इस गाने में बारीकियों और उतार-चढ़ाव को आवाज में उतारने की भी थी. दिलचस्प बात ये है कि इस गाने को फिल्म में लाने के लिए एक्टर ने डायरेक्टर को दोबारा इसे सुनने के लिए राजी नहीं किया होता, तो शायद आज ये गाना हमारे पास नहीं होता.

पहली बार सुनकर राज खोसला ने कर दिया था रिजेक्ट

साल 1964 में फिल्म वो कौन थी रिलीज हुई. इस फिल्म में मनोज कुमार और साधना ने अभिनय किया था. फिल्म की कहानी रहस्य और रोमांच के लिए जानी गई. इस फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी मदन मोहन के पास थी और इसके गाने के बोल राजा मेहदी अली खान ने लिखे थे. इस फिल्म का गाना 'लग जा गले' की धुन को मदन मोहन ने तैयार किया था. मदन मोहन के बेटे संजीव कोहली ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब मदन जी फिल्म के डायरेक्टर राज खोसला के पास पहली बार अपनी धुन को लेकर गए और सुनाया तो उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था. मदन मोहन इस बात से दुखी हुए, क्योंकि उनके मन में था कि ये एक यादगार धुन है. इसके बाद उन्होंने मनोज कुमार से इसे सुनने और राज खोसला को दोबारा सुनाने के लिए मनाने की गुजारिश की. 

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दोबारा सुना तो डायरेक्टर ने खुद को जूता मार लिया

मनोज कुमार को ये धुन पसंद आई थी, उन्होंने राज खोसला से इसे फिर सुनने के लिए मनाया. जब दूसरी बार वही धुन बजाई गई तो डायरेक्टर को ये बेहद पसंद आई. रिपोर्ट्स की मानें तो इस धुन को सुनते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. मदन मोहन की ऑफिशियल वेबसाइट पर बताए गए इस किस्से के मुताबिक, राज खोसला को पहले इस धुन को रिजेक्ट करने पर काफी शर्मिंदगी हुई और उन्होंने खुद को जूते से मारने तक की बात कही. मनोज कुमार ने भी बाद में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि गाना सुनने के बाद राज खोसला बाहर गए, अपनी चप्पल लेकर लौटे और खुद को मारने लगे. यही वह गाना था जिसे वह फिल्म से हटाने वाले थे. 

लता मंगेशकर के लिए भी आसान नहीं थी रिकॉर्डिंग

इस गाने को स्वर कोकिला ने गाया था. ये उनके पसंदीदा गानों में से एक था. लेकिन संजीव कोहली के मुताबिक उन्होंने खुद माना था कि ये गाना गाना बेहद मुश्किल था. खासकर इसमें इस्तेमाल की गई 'मुर्कियां' और सुरों के बीच जो बारीक उतार-चढ़ाव थे उनको निभाना बहुत ही मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था. मदन मोहन और लता जी ने साथ मिलकर के इस गाने को कुछ बदलावों के साथ गाया गया था. 

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