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जिसे सिस्टम ने समझा बेरोजगार, वही बन गया माफिया की आंखों का कांटा, हत्या के इल्जाम में फंसे जैकी श्रॉफ, नाना पाटेकर की इस फिल्म की रेटिंग 6.8

1992 की फिल्म ‘अंगार’ में जैकी श्रॉफ और नाना पाटेकर ने दमदार किरदार निभाए थे. बेरोजगारी, अपराध और भ्रष्ट व्यवस्था के बीच फंसे एक युवक की कहानी ने फिल्म को खास बना दिया. IMDb पर इसे 6.8 रेटिंग मिली है.

जिसे सिस्टम ने समझा बेरोजगार, वही बन गया माफिया की आंखों का कांटा, हत्या के इल्जाम में फंसे जैकी श्रॉफ, नाना पाटेकर की इस फिल्म की रेटिंग 6.8
अंगार में नजर आए थे नाना पाटेकर और जैकी श्रॉफ

साल 1992 में रिलीज हुई फिल्म 'अंगार' ने अपनी रिलीज के 34 साल पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर फिल्म के मुख्य कलाकार अभिनेता जैकी श्रॉफ ने फिल्म से जुड़ी यादों को फिर से ताजा किया. अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर ड्रामा के यादगार पलों का एक वीडियो मोंटाज शेयर किया, जिसमें जैकी श्रॉफ ने फिल्म का गाना 'इधर देखो उधर देखो' लगाया गया है. उनके किरदार जयकिशन 'जग्गू' और फिल्म के दूसरे कलाकारों के साथ उनके सीन भी शामिल है.

वीडियो के साथ जैकी ने लिखा, "फिल्म अंगार को रिलीज हुए 34 साल पूरे हो गए हैं. साथ ही उन्होंने फिल्म की कास्ट और क्रू के कई लोगों को टैग किया, जिनमें शशिलाल के. नायर, डिंपल कपाड़िया, कादर खान, अच्युत पोतदार, ओम पुरी, सुलभा देशपांडे और टॉम अल्टर शामिल हैं. शशिलाल के. नायर के निर्देशन में बनी हिंदी क्राइम-ड्रामा फिल्म 'अंगार' को बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन और प्रभावशाली माफिया फिल्मों में से एक माना जाता है, जिसमें मुंबई के अंडरवर्ल्ड, राजनेताओं और बिल्डरों के बीच के गठजोड़ को बेहद संजीदगी से दिखाया गया है.

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अंगार का लेखन सुजीत सेन ने किया था, जबकि कादर खान ने डायलॉग लिखे थे. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने म्यूजिक बनाया था और लिरिक्स आनंद बख्शी के थे. इसके मशहूर गानों में 'इधर देखो उधर देखो', 'मुश्किल में है कौन किसी का', 'गीत पुराने गांव', 'कितनी जल्दी यह मुलाकात गुजर जाती है' और 'चल आगे और देख पीछे' जैसे गाने शामिल थे. माना जाता है कि फिल्म की कहानी और जहांगीर खान (कादर खान) का किरदार मुंबई के शुरुआती अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला के जीवन से प्रेरित थी.

यह कहानी जग्गू (जैकी श्रॉफ) नाम के एक निडर और जोशीले नौजवान की है जो मुंबई की एक बस्ती में रहता है. जग्गू भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलता है. उसकी मुलाकात एक अनाथ लड़की से होती है जिसे वह अपने घर ले आता है. फिल्म की असली उलझन तब शुरू होती है जब जग्गू का सामना एक ताकतवर और खतरनाक खान परिवार (जहांगीर खान और उसके बेटों) से होता है. जग्गू जब इनके गलत मंसूबों के आगे नहीं झुकता, तब कहानी में जबरदस्त मोड़ आता है. फिल्म का बजट 2.50 करोड़ थे और बॉक्स ऑफिस पर इसने 7.50 करोड़ का कलेक्शन किया था.

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